जहां भय समाप्त होता है, वहीं से धर्म की शुरुआत होती है। मनुष्य के जीवन में जैसे ही धर्म शब्द प्रवेश करता है, उसके मन में अनेक प्रश्न जन्म लेने लगते हैं। यह...
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दशलक्षण महापर्व के अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में सत्य धर्म की गहन विवेचना करते हुए कहा कि वचन ही सत्य है और आत्मा ही वास्तविक सत्य है।...








