आज समूचा विश्व मातृ वंदना कर रहा है। मातृ वंदना के लिए संदर्भ की नहीं सदभाव की जरूरत है क्योंकि, मां ममत्व, त्याग, समर्पण और दृढ़ता की प्रतिमूर्ति है। मां...
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साधुओं की जन्म एवं कर्म भूमि धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ विराजित है। श्रावक-श्राविकाओं के संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। जिसमें हितेंद्र...
प्रमादमय स्त्रियों को प्रमादमय मूर्तियों की उपमा दी गई है, अर्थात स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है, जिस प्रकार मिट्टी की मूर्ति में मिट्टी की बहुलता...








