Tag - चातुर्मास

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दान का सार्थक स्वरूप और पनपती विकृतियां विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत किया शोधालेख : दान से दुर्गति का नाश होता है – डॉ. सुनील संचय

दान देकर के ही साधु और श्रावक दोनों ही कृतार्थ होते हैं। दान कोई सामाजिक व्यवस्था का वित्त प्रबंधन नहीं है अपितु यह वित्त प्रबंधन का एक उत्कृष्ट माध्यम है।...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : देव, शास्त्र, गुरु, धर्म कल्पवृक्ष हैं, जिनवाणी कामधेनु है- आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

 पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी खांदूकालोनी, बांसवाड़ा में संघ सहित विराजित हैं। आज की धर्मसभा में मंगल देशना में बताया कि वर्तमान में कर्मभूमि का...

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दिन में एक छण स्वयं की परछाई भी नहीं दिखेगी : 21 जून को सबसे बड़ा दिन और रात होगी सबसे छोटी

21 जून को रात्रि 02:20 बजे सूर्य सायन कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इससे सूर्य दक्षिणायन होंगे और वर्षा ऋतु का आरंभ होगा। यह जानकारी वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ...

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बच्चों का किया स्वागत : शासकीय हाईस्कूल निटहरा में मनाया गया प्रवेशोत्सव

शासकीय हाईस्कूल ग्राम निटहरा में नवीन प्रवेशोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। निटहरा के शासकीय हाई स्कूल में नवप्रवेशी छात्र छात्राओं को चंदन टीका...

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मैनपुरी के घिरोर में उपाध्यायश्री ने दी स्वीकृति : आगरा में होगा उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास

दिगंबर जैन समाज को इस चातुर्मास 2024 में मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य प्राप्त होने जा रहा है। उपाध्यायश्री के घिरोर में...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : मोक्ष मार्ग में भी कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है- आचार्य श्री समयसागर जी महाराज

आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि पाप कर्म की निर्जरा और पुण्य कर्म की निर्जरा इसमें क्रम है। पाप पहले मिटता है। फिर बाद में पुण्य...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : साधना के लिए कई प्रकार के साधन हुआ करते हैं, जिनसे होता है आत्मा का विकास – आचार्य श्री समय सागर जी

  आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि साधना के लिए कई प्रकार के साधन हुआ करते हैं जिनके माध्यम से आत्मा का विकास होता है।कभी-कभी...

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कुंडलपुर से चल रहा है मंगलविहार : आर्यिका पूर्णमति माताजी का चातुर्मास मुरार में 

ग्वालियर (राजेश जैन दद्दू)। ग्वालियर गोपाचल वाले पार्श्वनाथ भगवान की धरा पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिकारत्नश्री पूर्णमति...

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जैन तीर्थंकर प्रतिमा पद्मासन में होती है ध्यान अवस्था की मुद्रा में : जैन ऋषि-मुनियों की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है ध्यान योग

 एक समय था जब भारत भारतीयों की जीवन शैली का अभिन्न अंग हुआ करता था ध्यान योग परंतु समय बदला, परंपराएं बदलीं, जीवन शैली बदली और आधुनिकता की चकाचौंध में भारतीय...

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सद्कार्यों का किया गुणानुवाद : स्वामी जी का अवतरण दिवस मनाया गया

श्रुत पंचमी महोत्सव पर जगदगुरु पीठाधीश कर्मयोगी स्वस्तिश्री रवींद्रकीर्ति स्वामीजी के 75वें जन्म अवतरण दिवस पर पूज्य स्वामीजी सद्कार्यों का गुणानुवाद किया गया।...

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