आगरा के निर्मल सेवा सदन में 29 जुलाई से प्रारंभ होने वाले मुनि श्री 108 समत्वसागर जी महाराज ससंघ के चातुर्मास वर्षायोग को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान चातुर्मास के महत्व, धार्मिक कार्यक्रमों एवं तैयारियों की जानकारी दी गई तथा वर्षायोग पत्रिका का विमोचन भी हुआ। पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट।
आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में संतचर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य जगत विख्यात “गूगल बाबा” श्रमण मुनि श्री 108 समत्वसागर जी महाराज, मुनि श्री 108 शीलसागर जी एवं मुनि श्री 108 सुप्रभातसागर जी ससंघ के सान्निध्य में 29 जुलाई से प्रारंभ होने वाले चातुर्मास वर्षायोग को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
चातुर्मास का आध्यात्मिक महत्व
मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, तप, स्वाध्याय, अहिंसा और साधना का विशेष काल है। वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा के उद्देश्य से जैन साधु एक स्थान पर विराजमान रहकर धर्मप्रभावना करते हैं। यह काल आत्मकल्याण और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है।
वर्षायोग पत्रिका का हुआ विमोचन
प्रेस वार्ता के दौरान मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज एवं श्रुत मंथन वर्षायोग समिति द्वारा वर्षायोग पत्रिका का विधिवत विमोचन किया गया। पत्रिका में चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों, प्रवचनों एवं अन्य आयोजनों की विस्तृत जानकारी प्रकाशित की गई है।
युद्ध स्तर पर चल रही तैयारियां
चातुर्मास समिति के मुकेश जैन एवं विवेक जैन ने बताया कि पहली बार निर्मल सेवा सदन में मुनि श्री का वर्षायोग आयोजित हो रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। मंत्री प्रवीण जैन ने बताया कि स्वागत द्वार, आकर्षक सजावट, प्रकाश व्यवस्था एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं सहित सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
समिति के पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के अध्यक्ष मनोज जैन बल्ले, मंत्री प्रवीण जैन पद्मावती, कोषाध्यक्ष शैलेश जैन लालाजी, मुकेश जैन, विवेक जैन, मनोज जैन, चक्रेश जैन, रखी लाल जैन, रमेश जैन, रिंकू जैन, राजू जैन, आशीष जैन, रोहित जैन, अमित जैन, गौरव जैन, आनंद जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समिति के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
श्रद्धालुओं से सहभागिता का आह्वान
समिति ने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से 29 जुलाई को आयोजित मंगल कलश स्थापना समारोह एवं चातुर्मास के सभी धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।













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