मुरैना के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में वर्षायोग के दौरान आचार्य श्री उदारसागर जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए भगवान महावीर की दिव्यध्वनि और गौतम गणधर की दीक्षा का प्रसंग सुनाया। मुनि श्री उपशांतसागर जी ने अष्टद्रव्य पूजन की मर्यादा और अहिंसा का संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
मुरैना। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में वर्षायोग हेतु विराजमान जैनाचार्य अभिनंदनसागर जी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य आचार्य श्री उदारसागर जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि जैन दर्शन में यह पर्व गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान और आत्मकल्याण का प्रतीक है। इसका संबंध भगवान महावीर स्वामी के प्रथम प्रधान शिष्य गौतम गणधर (इंद्रभूति गौतम) की दीक्षा से जुड़ा हुआ है।
गौतम गणधर की दीक्षा से प्रारंभ हुई दिव्यध्वनि
आचार्य श्री ने कहा कि भगवान महावीर को केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद भी योग्य शिष्य के अभाव में उनकी दिव्यध्वनि का प्रवाह प्रारंभ नहीं हुआ था। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन इंद्रभूति गौतम ने भगवान महावीर के समवसरण में पहुंचकर अहंकार का त्याग किया और दीक्षा ग्रहण की। उनके प्रथम गणधर बनने के साथ ही भगवान महावीर की दिव्यध्वनि प्रवाहित हुई तथा जिनवाणी के माध्यम से धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रारंभ हुआ। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है
अष्टद्रव्य पूजन में रखें विशेष सावधानी
मुनि श्री उपशांतसागर जी महाराज ने अष्टद्रव्य के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप और फल केवल पूजन सामग्री नहीं, बल्कि श्रद्धा और आत्मशुद्धि के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि पूजन सामग्री के भूमि पर गिरने से पवित्र द्रव्यों का अनादर होता है तथा सूक्ष्म जीवों की अनजाने में हिंसा की संभावना रहती है। इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु को पूजन के समय पूर्ण सावधानी, स्वच्छता और जागरूकता रखनी चाहिए।
गुरु पूर्णिमा पर होंगे विशेष धार्मिक आयोजन
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आचार्य श्री अभिनंदनसागर जी महाराज का अष्टद्रव्य पूजन, गुरु वंदना एवं विशेष आराधना आयोजित की जाएगी। प्रातःकाल भगवान जिनेन्द्र का जलाभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य महापूजन भी सम्पन्न होगा। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।
9 अगस्त को होगा मंगल कलश स्थापना समारोह
आध्यात्मिक वर्षायोग समिति ने बताया कि वर्षायोग के अंतर्गत 9 अगस्त को भव्य मंगल कलश स्थापना समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।













Add Comment