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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर लद्दाख में आयोजित योग साधना अभ्यास : मंत्र योग से अंतरंग ऊर्जा जागृत होती है – योगभूषण महाराज


दसवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित खारे पानी की झील पैंगोंग लेक पर योग साधना का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। 8 डिग्री सेल्सियस की ठंडी हवा के बावजूद भी हजारों लोगों ने इस अनूठे कार्यक्रम में भाग लिया और योग साधना का अभ्यास किया। कार्यक्रम के विशेष आमंत्रित अतिथि जैन‌ संत मंत्र महर्षि (डॉ.) श्री योग भूषण जी महाराज ने मंत्र योग का अभ्यास करवाते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा और मन की शुद्धि का माध्यम है। पढ़िए यह रिपोर्ट…


लद्दाख। दसवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित खारे पानी की झील पैंगोंग लेक पर योग साधना का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। 8 डिग्री सेल्सियस की ठंडी हवा के बावजूद भी हजारों लोगों ने इस अनूठे कार्यक्रम में भाग लिया और योग साधना का अभ्यास किया। इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य आयोजक भिक्खु संघसेना, अध्यक्ष (महाबोधि इंटरनेशनल योगा एंड मेडीटेशन सेंटर, लेह) के नेतृत्व में इस अद्वितीय आयोजन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इस आयोजन में भारतीय सेना, लेह-लद्दाख का भी सहयोग रहा, जिन्होंने इस विशेष कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम के विशेष आमंत्रित अतिथि जैन‌ संत मंत्र महर्षि (डॉ.) श्री योग भूषण जी महाराज ने मंत्र योग का अभ्यास करवाते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा और मन की शुद्धि का माध्यम है। मंत्र योग से हम अपने भीतर की ऊर्जा को जागृत कर सकते हैं और जीवन में सकारात्मकता ला सकते हैं। इस अवसर पर सर्व धर्मों के प्रमुख संत भी उपस्थित थे, जिनमें प्रमुख रूप से गोस्वामी श्री सुशील जी महाराज (राष्ट्रीय संयोजक, भारतीय सर्वधर्म संसद) शामिल थे। उन्होंने योग के महत्व और उसकी सार्वभौमिकता पर अपने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर भिक्खु संघसेना ने कहा कि यह आयोजन योग की शक्ति और उसकी सार्वभौमिकता को दर्शाता है। पैंगोंग लेक की ठंडी और शांत वादियों में योग का अभ्यास एक आध्यात्मिक अनुभव था जिसने सभी को एक नई ऊर्जा और शांति का अनुभव कराया। गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा कि योग एकता का प्रतीक है।

 

यह आयोजन दिखाता है कि कैसे योग सभी धर्मों और संस्कृतियों को जोड़ता है। उल्लेखनीय है कि यह आयोजन केवल योग साधना तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि यह सभी धर्मों और संस्कृतियों के लोगों को एक मंच पर लाने का भी एक प्रयास था। इस ऐतिहासिक आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को एक नई ऊँचाई पर पहुंचाया है।

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