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महारानी चैना भैरव देवी कर्नाटक की वीर जैन रानी: चैना भैरवदेवी ने 54 वर्षों तक किया शासन 


भारतीय इतिहास में ऐसी अनेक वीरांगनाओं का उल्लेख मिलता है। जिन्होंने नारी शक्ति, साहस, प्रशासनिक दक्षता और धर्मनिष्ठा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्हीं में एक गौरवशाली नाम है महारानी चैना भैरव देवी का। जिन्हें दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक क्षेत्र में ‘गेरुसोप्पा की रानी’ के रूप में जाना जाता है। महारानी चैना भैरव देवी का शासनकाल 1552 से 1606 ईस्वी तक रहा। जबलपुर से पढ़िए, राजेश जैन रागी की यह खबर…


 जबलपुर। भारतीय इतिहास में ऐसी अनेक वीरांगनाओं का उल्लेख मिलता है। जिन्होंने नारी शक्ति, साहस, प्रशासनिक दक्षता और धर्मनिष्ठा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्हीं में एक गौरवशाली नाम है महारानी चैना भैरव देवी का। जिन्हें दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक क्षेत्र में ‘गेरुसोप्पा की रानी’ के रूप में जाना जाता है। महारानी चैना भैरव देवी का शासनकाल 1552 से 1606 ईस्वी तक रहा। वे जैन धर्म की अनुयायी थीं और विजयनगर साम्राज्य के अंतर्गत सालुवा वंश की प्रमुख शासिका थीं। उनका राज्य उत्तर कर्नाटक के वर्तमान उत्तर कन्नड़ जिले के तटीय भागों में स्थित था। जहां से काली मिर्च, इलायची और अन्य मसालों का व्यापार किया जाता था। यही कारण था कि विदेशी व्यापारियों विशेषकर पुर्तगालियों की इस क्षेत्र पर गहरी नजर थी परंतु, महारानी कोई साधारण शासिका नहीं थीं।

पुर्तगालियों का किया मुकाबला 

डॉ. यतीश जैन जबलपुर ने बताया कि उन्होंने पुर्तगाली आक्रमणों का डटकर सामना किया। उन्हें पराजित किया और अपने राज्य की आर्थिक स्वतंत्रता तथा सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की। यूरोपीय इतिहासकारों ने उन्हें ‘रैना दा पिमेंटा’ अर्थात ‘काली मिर्च की रानी’ की उपाधि दी क्योंकि, उनके नियंत्रण में मसालों का समृद्ध व्यापार था। उनका शासन न्याय, सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों पर आधारित था। जैन धर्म की अनुयायी होते हुए भी उन्होंने हिंदू और मुस्लिम प्रजा को समान रूप से सम्मान और संरक्षण दिया। उनके काल में जैन बसदियों और मंदिरों का निर्माण हुआ और धार्मिक साहित्य का विकास भी हुआ।

उनकी वीरता और दूरदृष्टि आज भी प्रेरणा का स्रोत है

इतिहास में ऐसी वीरांगनाएं बहुत कम हैं, जिन्होंने 50 वर्षों से अधिक समय तक शासन किया हो। महारानी चैना भैरव देवी ने न केवल शासन चलाया, बल्कि उन्होंने कर्नाटक की तटीय संस्कृति, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा भी की। उनकी स्मृति में आज भी कर्नाटक के गेरुसोप्पा, मिर्जन किला और चंद्रगुट्टी जैसे स्थान प्रेरणा के केंद्र बने हुए हैं। महारानी चैना भैरव देवी नारी शक्ति का जीता-जागता प्रतीक थीं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि धर्मनिष्ठा, साहस और आत्मबल से न केवल कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है, बल्कि इतिहास में अमर भी हुआ जा सकता है। वे न केवल कर्नाटक की बल्कि संपूर्ण भारत की गौरवशाली पुत्री थीं, जिनकी वीरता और दूरदृष्टि आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

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