अंबाह। प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र सिंहोनिया में शुक्रवार को भगवान शांतिनाथ, अरहनाथ एवं कुंथुनाथ की प्राचीन प्रतिमाओं का भव्य महामस्तकाभिषेक श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में अंबाह, मुरैना, ग्वालियर, मुरार, आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। प्रातःकाल पंडित संजय शास्त्री के निर्देशन में नित्य नियम पूजन, शांति विधान, शांतिधारा एवं यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके बाद 108 कलशों से भगवान शांतिनाथ की 21 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक किया गया। पवित्र जल से हुए अभिषेक के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू अर्पित कर पुण्यार्जन किया।

संयम और वैराग्य का संदेश देने वाला महापर्व
कमेटी प्रमुख जिनेश जैन ने कहा कि महामस्तकाभिषेक आत्मशुद्धि, संयम और वैराग्य का संदेश देने वाला महापर्व है। उन्होंने बताया कि भगवान शांतिनाथ के जीवन से मनुष्य को अहिंसा, क्षमा और आत्मानुशासन की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धा से किया गया अभिषेक आत्मा को निर्मल बनाने का प्रतीक है। आयोजन में रविंद्र जैन टिल्लू, संजय जैन, नीलेश जैन, रवि जैन, संजू जैन, डॉबी जैन, पिंटू जैन उपस्थित रहे।
शांतिनाथ भगवान का विशेष अभिषेक
उधर, अंबाह नगर के बड़ा जैन मंदिर में भी भगवान शांतिनाथ का विशेष अभिषेक किया गया। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के सदस्यों ने सामूहिक रूप से भगवान का जलाभिषेक किया। इसके पश्चात शांतिधारा की गई, जिसमें समाजजनों ने विश्वशांति और आत्मकल्याण की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।













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