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जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव से गया मनाया भगवान आदिनाथ की जयंती पर जैन मंदिर में हुआ अनुष्ठान


भगवान श्री आदिनाथ की जयंती पर बड़े जैन मंदिर में बुधवार को महा अनुष्ठान आयोजित कर विश्व शांति जन कल्याण की कामना की गई मंदिर में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव से मनाया गया।पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…….


अम्बाह ।भगवान श्री आदिनाथ की जयंती पर बड़े जैन मंदिर में बुधवार को महा अनुष्ठान आयोजित कर विश्व शांति जन कल्याण की कामना की गई मंदिर में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव से मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर अभिषेक भक्तजनों द्वारा किया गया। इसके बाद रजत कलशों से महामस्तिकाभिषेक किया गया एवं वृहद शांतिधारा की गई।अभिषेक के बाद संगीतमय पूजा पंडित महेंद्र कुमार शास्त्री के मुखारबिंद से कराई गई, जिसमें सभी भक्तों ने झूम-झूम कर एक- एक अर्घ्य श्रीजी के चरणों में समर्पित किया। इस अवसर पर जैन साध्वी विश्रेय श्री माता जी ने कहा कि अनादिकाल से जैन धर्म चल रहा है।

 48 दीपकों से भक्तामर पाठ हुआ आयोजित

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने सभी को असि, मसि, कृषि आदि की शिक्षा देकर जीवनयापन सिखाया और भारत देश का नाम आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत के नाम से भारत देश पडा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती अंजली जैन ने कहा कि आदिनाथ भगवान का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था,तब से हम सभी चैत्र कृष्ण नवमी को अयोध्या के साथ पूरे विश्व में जन्म कल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाते हैं। जन्म कल्याणक महोत्सव से पहले संध्या में 48 दीपकों से भक्तामर पाठ आयोजित हुआ। रात्रि में पालना झुलाने के साथ आरती और भजनों का कार्यक्रम हुआ।

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