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जीवन का निर्माण देव के उपदेश से होता है : पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भक्तिपूर्वक हुए कार्यक्रम


 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को श्री आदिनाथ जयंती के तहत श्री आदिनाथ भगवान का नित्य अभिषेक एवं शांति धारा पुण्यार्जक परिवार ने की। सभी इंद्रों ने भी अभिषेक और शांतिधारा में भाग लिया। धामनोद से पढ़िए, यह खबर…


धामनोद। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को श्री आदिनाथ जयंती के तहत पश्री आदिनाथ भगवान का नित्य अभिषेक एवं शांति धारा पुण्यार्जक परिवार ने की। सभी इंद्रों ने भी अभिषेक और शांतिधारा में भाग लिया। प्रतिदिन अभिषेक करने और देखने से कर्मों की निर्जरा होती है। जिनालय से सकारात्मक ऊर्जा ,जीवन में सुख शांति और पुण्य का आश्रव प्राप्ति होती है। श्री भगवान ऋषभदेव के जन्म के पूर्व भोग भूमि थी। कल्पवृक्ष थे। उनसे प्राणी जो भी इच्छा कामना करते थे वह वस्तु मिल जाती थी। देवलोक में कंठ से अमृत झरता था। इस कारण उन्हें भूख प्यास का अनुभव नहीं होता था। आदिनाथ भगवान के जन्म के बाद उन्होंने जीवन यापन करने के लिए प्रजा को असि ,मसि, कृषि, शिल्प ,कला और वाणिज्य का उपदेश दिया। पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी के माध्यम से अंक और लिपि का ज्ञान दिया। धर्म में बताया कि जीवन का निर्माण देव के उपदेश से, संयमित,अनुशासित जीवन संस्कार से निर्मित होता है। इसी से जीवन से निर्वाण अर्थात सिद्धालय की प्राप्ति होगी।

जनजागरण के लिए निकाली वाहन रैली

गुरुवार को जैन समाज धामनोद और मुनिसेवा समिति के सहयोग से धर्म प्रभावना को लेकर दो पहिया वाहन रैली निकाली गई। जो सुंदरेल फाटे से ढोल धमाकों के साथ गुलझरा तक गई। वहां से नगर के महेश्वर फाटा के श्रीराम चौराहा पर धर्म सभा में तब्दील हो गई। जहां समाज सचिव दीपक प्रधान, मुनिसेवा समिति सचिव संजय जैन और प्रणीति जैन ने प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्री आदिनाथ प्रभुजी ने सृष्टि का बदलाव किया और विश्व को असी मसी, कृषि और अंक कृषि का ज्ञान दिया। जैन समाज अध्यक्ष महेश जैन ने कहा कि जन जागरण रैली निकालकर जन-जन को जानकारी भी देना थी कि श्री आदिनाथ भगवान विश्व धर्म के निर्माता हैं। विश्व का कल्याणक किया है। इस अवसर पर नीलेश जैन ने भी कहा कि धर्म की प्रभावना करना था जैन समुदाय के समाजजनों ने अपने अपने दोपहिया वाहन से ध्वज लेकर नगर भ्रमण किया।

बालक श्री आदिकुमार को पालने मव झुलाया

इस अवसर पर मंदिर जी में श्री आदिनाथ प्रभु को बालक श्री आदिकुमार के रूप में सजावट कर वेशभूषा पहनाकर पलने में प्रथम बार झुलाने के पुण्यार्जक पारस महेंद्र जैन बने। आज स्वर्ण कलश करने के लाभार्थी बने विभा सुनील जैन, प्रशांत जैन, शांतिधारा के लाभार्थी सुरेश जैन परिवार शोभा, सुशील जैन, एकता विजय जैन थे। मंदिर में भव्य सजावट की गई थी। अब रोजाना बीस दिन तक महिलाओं द्वारा भक्ति व विनती के कार्यक्रम संध्या को होगे। संचालन दीपक प्रधान ने किया। आभार प्रशासनिक सचिव लोकेंद्र जैन ने माना। यह जानकारी सुनील जैन, अजय जैन और मीडिया प्रभारी यश जैन ने दी।

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