दिल्ली से आरंभ हुई नेमि-गिरनार धार्मिक राष्ट्रीय पदयात्रा के संबंध में विगत 17 जून को राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को पत्र लिखकर यात्रा के निर्विघ्न संपन्न करवाने की गुहार की है। नईदिल्ली से पढ़िए, यह खबर…
नईदिल्ली। दिल्ली से आरंभ हुई नेमि-गिरनार धार्मिक राष्ट्रीय पदयात्रा के संबंध में विगत 17 जून को राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को पत्र लिखकर यात्रा के निर्विघ्न संपन्न करवाने की गुहार की है। राष्ट्रपति को लिखे पत्र में बताया कि गुजरात हाईकोर्ट, स्पेशल सिविल एप्लीकेशन नंबर 6426 वर्ष 2024 में जस्टिस जयंत पटेल के 17 फरवरी को दिए गए आदेश के अनुसार गिरनार पर्वत की पांचवी टोंक पर जैन और पर्यटक यात्री अपनी आम्नाय अनुसार धार्मिक कियाएं कर सकेंगे। इसका पालन करवाने का निर्देश दिया गया था। उसी का पालन करवाने के संबंध में आदेश की प्रतिलिपि जूनागढ़ कलेक्टर और जूनागढ़ एसपी को प्रदान की गई थी। विश्व जैन संगठन की ओर से दिल्ली से जूनागढ़ गिरनार तक धार्मिक राष्ट्रीय पदयात्रा निकाली जा रही है। संघ नायक राकेश जैन गोहिल ने दिए गए पत्र में निवेदन किया है कि 2 जुलाई को यह जैन धार्मिक पदयात्रा, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी होंगे गिरनार पर्वत की दूसरी, तीसरी, चौथी तथा पांचवी टोंक में धार्मिक मान्यता के अनुसार अपनी धार्मिक क्रियाएं करने के लिए पहुंचेंगे। इस दिन भगवान नेमिनाथ जी का निर्वाण दिवस भी है। उन्होंने बताया कि हाईकोट के आदेश के अनुसार जैन पदयात्रियों के साथ पांचपी टोंक में किसी के द्वारा किसी भी प्रकार की असुविधा, बाधाएं, मारपीट आदि हिंसक घटनाएं पैदा न हो। ऐसे प्रबंध पांचवीं टोंक सहित पर्वत क्षेत्र में किए जाएं। जैन यात्रियों के लिए पूरे मार्ग और पांचवीं टोंक और उसके बाहर सुरक्षा के माकूल बंदोबस्त किए जाएं।
पांचवीं टोंक पर है भगवान नेमिनाथ की प्राचीन मूर्ति
उन्होंने बताया कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक में दिगंबर जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी के पाषाण में उत्कीर्ण प्राचीन चरण चिन्ह हैं। इसी पांचवी टोंक के पीछे के भाग में नीचे की ओर पाषाण की भगवान नेमिनाथ की प्राचीन मूर्ति भी है। उन्होंने आग्रह किया कि इस पत्र में देश विभिन्न भागों से पहुंचने वाले सभी यात्री अपनी धार्मिक भावनाओं के अनुसार क्रियाएं कर सकें। इसके लिए हर संभव कदम उठाने की मांग की गई है। उन्होंने पत्र में बताया कि विशेष रूप से पांचवीं टोंक में उपस्थित रहने वाले व्यक्तियों द्वारा जैन यात्रियों के साथ मारपीट, डराने-धमकाने और आतंकित करने की घटनाएं होती रहती हैं। पत्र में अवगत करवाया गया कि विगत 24 मई को आशीष प्रभाकर डहाले जैन निवासी मालेगांव, जैन मंदिर वासिम महाराष्ट्र के साथ गिरनार की पांचवीं टोक में रहने वाले व्यक्ति ने डंडे से सिर, पीठ और हथेली पर वार किया था। यह कोर्ट के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन किया गया। साथ ही धार्मिक अल्प संख्यकों के अधिकारों का भी हनन किया गया।
सुरक्षा बंदोबस्त की अपील की
राकेश जैन गोहिल ने पत्र में मांग की है कि कोर्ट के निर्देशों एवं मानवाधिकार उल्लंघन की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए समुचित सुरक्षा सुनिश्च्ति कराने की व्यवस्था की जाए। साथ ही हमें भी सूचित किया जाएं। पत्र की प्रतिलिपि गुजरात के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय अल्प संख्यक आयोग के अध्यक्ष, अहमदाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ऑफ गुजरात हाईकोर्ट, तथा गुजरात के गृहमंत्री, जूनागढ़ कलेक्टर, एसपी को भी वैधानिक कार्रवाई के लिए सौंपी है।













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