जयपुर के जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित भगवान नेमिनाथ जैन मंदिर ने 17 जुलाई 2026 को अपनी स्थापना के 46 वर्ष पूर्ण कर 47वें वर्ष में प्रवेश किया। आध्यात्म, साधना, सेवा और संस्कारों का यह केंद्र आगामी चातुर्मास के लिए भी विशेष उपलब्धि प्राप्त कर रहा है। पढ़िए श्रीफल साथी पदम जैन बिलाला एवं राकेश जैन (दूरदर्शन) की यह रिपोर्ट।
जयपुर। जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित भगवान नेमिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जैन धर्म की आस्था, आत्मिक शांति और साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। 17 जुलाई 1980 को प्रतिष्ठित यह मंदिर आज 46 वर्ष पूर्ण कर 47वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। स्थापना दिवस के अवसर पर समाज में उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण है।
इतिहास और आध्यात्मिक महत्व
मंदिर का भूमि पूजन 14 दिसम्बर 1978 को श्रेष्ठीजनो द्वारा सम्पन्न किया गया था। इसके बाद 17 जुलाई 1980 को मूलनायक भगवान नेमिनाथ की विधिवत प्रतिष्ठा हुई। मंदिर में भगवान नेमिनाथ के साथ भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर स्वामी, पद्मावती माता, क्षेत्रपाल देवता एवं जिनवाणी वेदी भी विराजमान हैं।
दिव्य वास्तुकला और विशेष आकर्षण
मंदिर परिसर में स्वर्णिम आभा से युक्त सहस्रकूट जिनालय, बड़े बाबा कुण्डलपुर की प्रतिकृति स्वरूप ध्यान केंद्र, साधु-संतों के लिए चार मंजिला संयम भवन, विशाल गुम्बज तथा भगवान नेमिनाथ के पंचकल्याणक दर्शाते भित्तिचित्र इसकी विशेष पहचान हैं। यही विशेषताएं इसे राजस्थान के प्रमुख जैन तीर्थों में स्थान प्रदान करती हैं।
संस्कार, साधना और सामाजिक सेवा का केंद्र
मंदिर में नियमित रूप से पूजा, स्वाध्याय, ध्यान, पाठशाला एवं नैतिक शिक्षण की गतिविधियां संचालित होती हैं। इसके साथ ही संस्कारशाला, औषधालय, महिला मंडल एवं युवा मंच के माध्यम से समाज सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन भी किया जाता है।
संत सान्निध्य से बढ़ी धर्म प्रभावना
मंदिर को समय-समय पर अनेक आचार्य एवं मुनि संघों का सान्निध्य प्राप्त हुआ है। आचार्य विराग सागर जी, आचार्य वर्धमान सागर जी, आचार्य वसु नंदी जी, आचार्य सुनील सागर जी, आचार्य सुंदर सागर जी सहित अनेक संतों के मंगल प्रवास से यहां धर्म प्रभावना को नई दिशा मिली। अब तक छह चातुर्मास सम्पन्न हो चुके हैं।
2018 का पंचकल्याणक रहा ऐतिहासिक
वर्ष 2018 में आचार्य प्रसन्न सागर जी एवं गणिनी आर्यिका गौरवमति माताजी के सान्निध्य में आयोजित पंचकल्याणक महामहोत्सव मंदिर के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय माना जाता है। गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी द्वारा रचित “नेमिनाथ स्तुति एवं दीप-अर्चना” ने भी मंदिर को विशेष आध्यात्मिक पहचान प्रदान की।
47वें वर्ष का शुभारंभ बनेगा ऐतिहासिक
स्थापना दिवस के मात्र दो दिन बाद, 19 जुलाई 2026 को आध्यात्म योगी आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी मुनिराज ससंघ का जनकपुरी-ज्योतिनगर मंदिर में चातुर्मास हेतु भव्य मंगल प्रवेश होने जा रहा है। जनकपुरी जैन समाज को पहली बार किसी आचार्य संघ का चातुर्मास कराने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।
धर्म, सेवा और संस्कार का संदेश
मंदिर स्थापना दिवस समाज को धर्म की गरिमा बढ़ाने, मंदिरों से आत्मिक संबंध प्रगाढ़ करने तथा सेवा, संयम और संस्कारों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा, दीप-अर्चना, ध्वजारोहण एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।













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