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अहंकारी, कठोर और चतुर लोगों को पहचाने दूरी बनाएं : मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने प्रवचन में दिया संदेश 


पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का विदिशा से सागर की ओर विहार जारी है। इसी दौरान आचार्यश्री के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थसागर जी महाराज ने अपने नित प्रवचन के दौरान समाजजनों को अहंकार से बचने का संदेश दिया। विदिशा से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


विदिशा। पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का विदिशा से सागर की ओर विहार जारी है। इसी दौरान आचार्यश्री के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थसागर जी महाराज ने अपने नित प्रवचन के दौरान समाजजनों को अहंकार से बचने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 3 प्रकार के दुश्मन होते हैं, जो सबसे खतरनाक होते हैं। पहले अहंकारी दूसरे कठोर तथा तीसरे चतुर। उन्होंने बताया कि अहंकारी व्यक्ति, ऐसा इंसान अपने अहम के लिए कुछ भी कर सकता है। उसे न तो दूसरों की भावनाओं की परवाह होती है, न ही रिश्तों की कद्र। वह खुद को श्रेष्ठ मानता है और जब उसका अहंकार आहत होता है तो वह विनाशक बन सकता है। ऐसे लोग दूसरों को नीचा दिखाने के लिए कोई भी सीमा पार कर सकते हैं। कठोर हृदय वाला व्यक्ति, यह वह होता है, जिसे किसी की तकलीफ या भावनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता। न सहानुभूति, न संवेदना। जब ऐसे लोग शत्रु बनते हैं, तो वे किसी दया की उम्मीद नहीं छोड़ते।

उनकी कठोरता उन्हें क्रूर बना देती है, जिससे वे दूसरों को मानसिक, भावनात्मक और कभी-कभी शारीरिक रूप से भी चोट पहंुचा सकते हैं। चतुर दुश्मन यह सबसे खतरनाक होता है क्योंकि, इसकी चालें धीमी और छुपी होती हैं। यह सामने से हमला नहीं करता, बल्कि योजना बनाकर, चालाकी से पीछे से वार करता है।

ये लोग अक्सर मीठी बातें करते हैं, लेकिन अंदर से आपके पतन की योजना बनाते हैं। इन तीनों से सावधान रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनका नुकसान धीमा, गहरा और लंबे समय तक असर डालने वाला होता है। समझदारी इसी में है कि ऐसे लोगों को पहचानकर दूरी बनाए रखें और खुद को मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से सुरक्षित रखें।

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