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भुवनेश्वर में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर हुए आरंभ : जैनत्व संस्कार के साथ हुआ शिक्षण शिविरों में अध्यापन


भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट, जैनम् फाउंडेशन दिल्ली के तत्वावधान में भुवनेश्वर (उड़ीसा) के विभिन्न स्थानों पर 5 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविरों में अध्यापन के लिए वरिष्ठ एवं युवा विद्वानों के साथ कला विशेषज्ञ विदुषी महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। भुवनेश्वर से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की खबर…


भुवनेश्वर। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के जन्म दिवस के पावन अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज, गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी , गणिनी आर्यिका श्री आर्ष माताजी माता जी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट, जैनम् फाउंडेशन दिल्ली के तत्वावधान में भुवनेश्वर (उड़ीसा) के विभिन्न स्थानों पर 5 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविरों में अध्यापन के लिए वरिष्ठ एवं युवा विद्वानों के साथ कला विशेषज्ञ विदुषी महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। शिक्षण शिविरों में ज्ञान दर्पण, भाग 1, 2 पूजन शिविर, मेहंदी, सिलाई, नृत्य आदि की क्लास संचालित हो रही है। शिविरों के आयोजन में सभी ने दान देकर सहयोग किया। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया कि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से बंगाल, झारखंड, उड़ीसा क्षेत्र में पाठशाला, होम्योपैथिक अस्पताल, मंदिर,धर्मशाला एवं समाज हित के अनेक कार्य हुए हैं। वर्ष 2000 से अब तक शिक्षण शिविरों के माध्यम से धार्मिक शिक्षा एवं नैतिक शिक्षा का ज्ञान की क्लासों के माध्यम से बच्चों को संस्कार दिए जा रहे हैं। भारतीय संस्कृति में पश्चात संस्कृति का प्रवेश होना हमारा पतन का कारण है। इसी कारण ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन संस्कार शिविरों का आयोजन होता आ रहा हैं।

शिविर निर्देशक ब्र. मंजुला दीदी,ब्र. मनीष भैया ने कहा कि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज ने भारतवर्ष में ज्ञान और शाकाहार का संदेश दिया। हमारा भी कर्तव्य है, कि हम उनके आदर्श पर चलें उनके अवतरण दिवस के पावन अवसर पर उनके द्वारा बताए गए मार्ग का अनुशरण कर,लोगों को बताएं। शिविरों में थैला,रजिस्टर,पेन आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी की प्रेरणा से ज्ञानार्ष भक्त मंडल परिवार ने दिए और प्रतिवर्ष 1000 की संख्या में संस्था द्वारा सराक शिविरों के लिए दिए जाएंगे। शिक्षण शिविरों में मुख्य रूप से पं. जयकुमार दुर्ग, पं. शिखरचंद जैन भिलाई, पं. राजकुमार जैन कर्द, विदुषी राखी जैन स्थानीय स्तर पर हेमंत जैन सराक, रामजी जैन सराक का सहयोग रहा।

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