अतिशय चमत्कारी भगवान पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र अडिन्दा में गणिनी आर्यिका श्री सुभूषणमति माताजी ससंघ का 42वें वर्षायोग हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवचन में माताजी ने अतिशय क्षेत्रों की महिमा और साधना के महत्व पर प्रकाश डाला। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट।
डडूका (बांसवाड़ा, राजस्थान)। अतिशय चमत्कारी भगवान पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र अडिन्दा की पावन धरा पर परम पूज्य चर्या शिरोमणि, गुरुपरंपरा गौरव एवं आगमिक प्रखर वक्ता गणिनी आर्यिका रत्न श्री सुभूषणमति माताजी ससंघ का 42वें वर्षायोग (चातुर्मास) हेतु भव्य एवं मंगलमय प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ एवं गणिनी माताजी के जयघोषों से पूरा क्षेत्र धर्ममय हो उठा।
भक्ति और श्रद्धा के बीच हुआ मंगल प्रवेश
मंगल प्रवेश के पश्चात गणिनी माताजी के श्रीमुख से उच्चारित मंगल मंत्रों के साथ अतिशय चमत्कारी भगवान पार्श्वनाथ का दुग्धाभिषेक सम्पन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
वर्षायोग और अतिशय क्षेत्र का महत्व बताया
धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणिनी श्री ने कहा कि सिद्धक्षेत्र एवं अतिशय क्षेत्रों में वर्षायोग का अपना विशिष्ट महत्व है। उन्होंने कहा कि नगरों में श्रावक साधुओं के समीप रहते हैं, जबकि अतिशय क्षेत्रों में साधु भगवान के चरणों में रहकर साधना, भक्ति और आराधना करते हैं। उन्होंने कहा कि जहां श्रद्धा होती है, वहीं अतिशय प्रकट होते हैं और भगवान की भक्ति में लीन होना ही वास्तविक अतिशय है।
अतिशय स्वयं प्रकट होते हैं
गणिनी माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि प्राचीन जिनबिंबों में स्वाभाविक रूप से अतिशय प्रकट होने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि अतिशय बनाए नहीं जाते, बल्कि श्रद्धा और भक्ति से स्वयं प्रकट होते हैं। ऐसे अतिशय सम्यक्त्व एवं मोक्षमार्ग की प्रेरणा देने वाले बनते हैं।
गुरु भक्ति का भावपूर्ण आयोजन
मंगल प्रवचन के पश्चात श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने गणिनी माताजी का नीर-क्षीर से पाद प्रक्षालन कर पुष्पवृष्टि के साथ भावभीना स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि गुरुचरणों के स्पर्श से क्षेत्र की महिमा और अधिक बढ़ेगी तथा वर्षायोग के दौरान आगम वाणी का अमृत प्रवाह असंख्य जीवों के कल्याण का माध्यम बनेगा।













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