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6 पिच्छिधारी साधुओं का हुआ नगर प्रवेश : संस्कार ही जीवन में सफलता का कारण – आचार्य विनम्र सागर


भक्तामर वाले बाबा उच्चारणाचार्य विनम्र सागर महाराज ने संघस्थ 16 पिच्छीधारी साधुओं के साथ प्रात: काल नगर प्रभावना पूर्वक प्रवेश हुआ, जिनकी अगुवाई जैन समाज ने उत्साह पूर्वक की। इस अवसर पर उन्होंने धर्मसभा को भी संबोधित किया। पढ़िए राजीव सिंघाई की विस्तृत रिपोर्ट..


ललितपुर। गणाचार्य विरागसागर महाराज के प्रभावक शिष्य भक्तामर वाले बाबा उच्चारणाचार्य विनम्र सागर महाराज ने संघस्थ 16 पिच्छीधारी साधुओं के साथ प्रात: काल नगर प्रभावना पूर्वक प्रवेश हुआ, जिनकी अगुवाई जैन समाज ने उत्साह पूर्वक की। ग्राम पनारी से सुबह सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुजन आचार्य श्री विनम्रसागर महाराज ससंघ के विहार के लिए पहुंचे, जहां आचार्य श्री के दर्शन के उपरान्त उनके विहार में सम्मलित हुए।

कैलगुवा तिराहे पर गाजे-बाजे के साथ आचार्य श्री की अगुवाई हुई। शोभायात्रा में आचार्य श्री विनम्र सागर महाराज के संघस्थ मुनि विज्ञ सागर महाराज, विनंद सागर महाराज, मुनि विनुत सागर महाराज, मुनि शुभ सागर महाराज, मुनि विश्ववीर सागर महाराज, मुनि विश्वधीर सागर महाराज, आर्यिका विमल माता जी, आर्यिका विनेह माता जी, वितप माता जी, विसम माता जी, विपुल माता जी, विमुद माता जी, विभव्य माता जी, विशर्व माता जी, प्रभा माता जी अपना आशीर्वाद प्रदान कर रहे थीे।

शोभायात्रा अटामंदिर पहुंची, जहां जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री डा. अक्षय टडैया, अखिलेश गदयाना, मंदिर प्रबंधक भगवानदास कैलगुवा, कपूरचंद लागौन, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, मनोज जैन बबीना, अक्षय अलया जिनेन्द्र डिस्को सहित श्रावकों ने पादप्रक्षालन कर अगुवाई की। आचार्य श्री विनम्र सागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए जीवन में संस्कारों की महिमा बताई और कहा धर्म से ही संस्कार मिलते हैं। उन्होंने ललितपुर नगरी की धर्मपरायणता को आदर्श बताया और कहा कि साधु संगत में जितना अधिक रहोगे, संस्कार उतने अधिक मिलेंगे।

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