आचार्य श्री चंद्रप्रभसागरजी महाराज संघ का कुंभोज में भव्य मंगलमय प्रवेश हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। आचार्यश्री संघ का कुंभोज में मंगल प्रवेश के मौके पर शोभायात्रा बडे गाजेबाजे से प्रारंभ हुई। आचार्य श्री चंद्रप्रभसागर महाराज जी ससंघ की अगवानी में रथ, घोडा, बैलगाडी शामिल रहीं। कुंभोज से पढ़िए, श्रीफल साथी की यह खबर…
कुंभोज(महाराष्ट्र)। आचार्य श्री चंद्रप्रभसागरजी महाराज संघ का कुंभोज में भव्य मंगलमय प्रवेश हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। आचार्यश्री संघ का कुंभोज में मंगल प्रवेश के मौके पर शोभायात्रा बडे गाजेबाजे से प्रारंभ हुई। आचार्य श्री चंद्रप्रभसागर महाराज जी ससंघ की अगवानी में रथ, घोडा, बैलगाडी शामिल रहीं। सफेद वस्त्र पहनकर श्रावक-श्राविका उपस्थित थे। इस दौरान श्रावकों ने विभिन्न स्थानों पर आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन किया। जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्व चातुर्मास 2026 के लिए आचार्यश्री चंद्रप्रभसागरजी महाराज, मुनिश्री नमितसागरजी, मुनिश्री भास्वतसागर जी, मुनिश्री सरलसागरजी मुनिश्री चंद्रकीर्तिसागरजी, ऐलक श्री वात्सल्यसागरजी का आगमन शनिवार को सुबह 8 बजे हुआ।

आचार्यश्री ने जिओ और जीने दो का महत्व बताया
यह केवल एक मंगल प्रवेश नहीं था, बल्कि कुंभोज के आध्यात्मिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बनने जा रहा है। आचार्य श्री चंद्रप्रभ सागर जी महाराज ने सकल जैन समाज को आशीर्वाद दिया। आचार्य श्री चंद्रप्रभ सागर जी महाराज जी ने भगवान महावीर स्वामी के मुख्य संदेश अहिंसा के बारे में बताया। जिओ और जीने दो का महत्व बताया। भरत बाहुबली के जलयुद्ध, मल्लयुद्ध और दृष्टि युद्ध का दृष्टांत दिया।
बाहुबली द्वितीय होकर भी अद्वितीय थे
चक्रवर्ती सम्राट भरत और उनके छोटे भाई बाहुबली के बीच विशाल सेनाओं के विनाश को रोकने के लिए तीन विशेष अहिंसक व्यक्तिगत धर्म-युद्ध (दृष्टि युद्ध, जल युद्ध और मल्ल/बाहु युद्ध) तय हुए थे। जिनमें बाहुबली विजयी रहे। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के पुत्र बाहुबली द्वितीय होकर भी अद्वितीय थे।
आयोजन को लेकर धार्मिक उल्लास
श्री भगवान आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कुंभोज, श्री भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर एवं सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से विद्यासन्मति दास पावन वर्षायोग 2026 का आयोजन बडे धार्मिक उत्साह के साथ किया जा रहा है।













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