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पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर का उदयपुर में मंगल प्रवेश :  भव्य अगवानी के लिए उमड़े श्रद्धालु


वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश दो अप्रेल को झीलों की नगरी उदयपुर में हुआ है। उनका उदयपुर में प्रवेश 21 साल बाद हुआ है। पढ़िए विशेष रिपोर्ट…


उदयपुर। वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश दो अप्रेल को झीलों की नगरी उदयपुर में हुआ है। आचार्य श्री के सानिध्य में महावीर जयंती मनाई जाएगी। उदयपुर में सर्वऋतु विलास में 1 से 5 मई तक तथा सेक्टर 11 में 21 से 25 मई तक आचार्य वर्धमान सागर के सानिध्य में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा होगी। इस अवसर पर शोभायात्रा फतह स्कूल से प्रारंभ होकर टाउन हॉल में सभा के रूप में परिवर्तित हुई, जहां दोपहर तीन आचार्य श्री का अभिनंदन किया जा रहा है।

आचार्य श्री का उदयपुर की धरा पर मंगल प्रवेश 21 वर्ष बाद हुआ है। करीब महीने भर पहले किशनगढ़ में हुए ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तरह ही उदयपुर में भी दो मंदिरों के पंचकल्याणक में सान्निध्य देने के लिए आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ ने किशनगढ़ से उदयपुर विहार किया था। प्रथमाचार्य चरित्र चक्रवती आचार्यश्री शांतिसागर की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर ने 40 दिन तक किशनगढ़ में धर्म बरखा की।

प्रवास दौरान पंच कल्याणक प्रतिष्ठा, 8 दिवसीय श्री भक्तामर विधान, नूतन बेदी प्रतिष्ठा, आचार्यश्री धर्मसागर शिक्षण संस्थान के नवीन भवन का लोकार्पण व मुनि दीक्षा समारोह आदि अविस्मरणीय कार्यक्रमों में सान्निध्य देते हुए जैन समाज के लोगों को मंगलमयी आशीर्वाद दिया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बाद 8 मुनिराजों,19 आर्यिका माताजी, 2 क्षुल्लक एवम् एक क्षुल्लिका माताजी सहित भव्य मंगल प्रवेश किया है।

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