तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज द्वारा “फ्यूचर ऑफ इन्नोवेशन एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (FIST)” थीम पर आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस “हेल्थ फॉरेंसिक-2026” का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं शंखनाद के साथ हुआ। पढ़िए श्याम सुंदर भाटिया की यह विशेष रिपोर्ट…
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज द्वारा “फ्यूचर ऑफ इन्नोवेशन एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (FIST)” थीम पर आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस “हेल्थ फॉरेंसिक-2026” का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं शंखनाद के साथ हुआ।
एआई से बढ़ेगा परफेक्शन और एक्सीलेंस – डॉ. अजय आर्या
उत्तराखंड सरकार में मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. अजय आर्या ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि एलाइड एवं अप्लाइड साइंस के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वरदान साबित होगी। इससे कार्यों में परफेक्शन और एक्सीलेंस में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस और एलाइड साइंस एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके विकास में दोनों की समान भूमिका है। साथ ही उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि एआई का उपयोग सीमित और सही तरीके से करें। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे स्वयं को कमतर न आंकें, अपनी क्षमता को पहचानें और ज्ञान को व्यावहारिक रूप में लागू करें।
साइबर क्राइम ‘वर्चुअल ड्रग’ – डॉ. रणजीत सिंह
एसआईएफएस के फाउंडर डॉ. रणजीत सिंह ने गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए कन्विक्शन रेट बढ़ाना आवश्यक है, जिससे न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत हो सके। उन्होंने साइबर क्राइम को “वर्चुअल ड्रग” बताते हुए कहा कि इसे रोकने के लिए आपराधिक मामलों की जांच में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति अनिवार्य की जानी चाहिए। उन्होंने छात्रों को नवाचार आधारित शोध कार्यों को व्यावहारिक रूप देने के लिए प्रेरित किया।

एआई से फॉरेंसिक साइंस को मिलेंगे नए आयाम
डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने कहा कि एआई और आधुनिक तकनीक के समन्वय से फॉरेंसिक साइंस को नए पंख मिलेंगे और कन्विक्शन रेट में भी वृद्धि होगी। उन्होंने फॉरेंसिक साइंस में पीजी कोर्स की शुरुआत को विश्वविद्यालय की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया तथा इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रेरित किया।
फॉरेंसिक की न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका
लॉ कॉलेज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित ने कहा कि त्वरित न्याय में फॉरेंसिक साइंस की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि 1950 में जहां कन्विक्शन रेट लगभग 35 प्रतिशत था, वह आज बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिसमें फॉरेंसिक साइंस का बड़ा योगदान है। कॉन्फ्रेंस चेयरपर्सन एवं प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कहा कि एलाइड हेल्थ साइंस मेडिकल सेक्टर की बैकबोन है और एलाइड एवं फॉरेंसिक साइंस को एक मंच पर लाना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
तकनीकी सत्रों में शोध प्रस्तुतियां
कॉन्फ्रेंस के चार तकनीकी सत्रों में 80 ओरल रिसर्च पेपर्स एवं 34 पोस्टर्स प्रस्तुत किए गए। साथ ही फॉरेंसिक विभाग के विद्यार्थियों की छह टीमों— द एविडेंस एनिग्मास, फॉरेंसिक फाल्कन्स, द क्राइम सीन स्लूथ्स, ट्रेस टाइटंस, द साइलेंट विटनेस और द एनालिटिकल एसेस द्वारा क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन का प्रदर्शन किया गया।
विशेषज्ञों के व्याख्यान
पैनल डिस्कशन में ग्लोबल रिसर्च एंड साइंटिफिक कोलैबोरेशन यूआईएच शंघाई के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल के क्लिनिकल साइंटिस्ट डॉ. राम कैलाश गुर्जर, पायोनियर सेंटर ऑफ बायोसाइंसेज गाजियाबाद के डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार शर्मा एवं टीएमयू के सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी ने एआई, हेल्थकेयर और बायोसाइंस से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।
गणमान्यजनों की उपस्थिति
कार्यक्रम में ज्वाइंट रजिस्ट्रार डॉ. वैभव रस्तोगी, एसोसिएट डीन डॉ. अमित कंसल, सीटीएलडी के डायरेक्टर प्रो. पंकज कुमार, आईक्यूएसी के डायरेक्टर प्रो. नीशीथ मिश्रा, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. एम.पी. सिंह, एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन प्रो. पी.के. जैन, चीफ लाइब्रेरियन डॉ. विनीता जैन सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज की ओर से डॉ. अर्चना जैन, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. शिवसरन सिंह, डॉ. पिनाकी अदक, डॉ. शिखा पालीवाल, डॉ. आभा तिवारी, डॉ. वर्षा राजपूत, डॉ. रेनू चौधरी, प्रियंका सिंह, बैजनाथ दास, विवेचना, साक्षी बिष्ट एवं अदिति त्यागी सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सौम्या त्रिपाठी द्वारा किया गया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।













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