सत्य और अहिंसा के अवतार भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव इंदौर में पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। ‘जियो और जीने दो’ के संदेश के साथ पूरी आर्थिक राजधानी महावीर मय नजर आई। विभिन्न स्थानों से निकले जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जयकारों के साथ चल रहे थे। इंदौर से पढ़िए, प्रीतम लखवाल की यह विस्तृत रिपोर्ट…
इंदौर। सत्य और अहिंसा के अवतार भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव इंदौर में पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। ‘जियो और जीने दो’ के संदेश के साथ पूरी आर्थिक राजधानी महावीर मय नजर आई। विभिन्न स्थानों से निकले जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जयकारों के साथ चल रहे थे। शोभायात्रा में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज, मुनि श्री संबुद्ध सागर जी भी चल रहे थे। राजवाड़ा क्षेत्र में सभी जगह से निकले जुलूस एकत्र हुए और गोराकुंड चौराहा, मल्हारगंज, इतवारिया बाजार, खजूरी बाजार, राजवाड़ा, जवाहर मार्ग सहित आसपास के क्षेत्र में क्षेत्र में भगवान की शोभायात्रा और जीवंत झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। बैंडबाजों के साथ भक्ति गीतों पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर नृत्य में लीन होकर भक्ति कर रहे थे। जैन समाज के विभिन्न सामाजिक सोशल ग्रुप, संगठन, महिला और युवा मंडलों की ओर से शोभायात्रा में शामिल महिलाओं, पुरुषों तथा युवा पदाधिकारियों का दुप्पटा, माला पहनाकर स्वागत किया गया। संगठन के पदाधिकारियों के साथ कार्यकर्ताओं ने मंच लगाकर शोभायात्रा का स्वागत किया। राजवाड़ा पर शोभायात्रा का ऐतिहासिक स्वागत हुआ।

भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी
विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्राचीन कांच मंदिर से स्वर्ण रथ पर भगवान को विराजित कर ऐतिहासिक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के समापन के बाद कांच मंदिर इतवारिया बाजार में विशाल धर्मसभा हुई। जिसमें दिगंबर जैन समाज के साधु और मुनिराजों ने धर्म की प्रभावना करते हुए भगवान महावीर के जियो और जीने दो के संदेश को जीवन में अपनाने और भगवान महावीर की तरह सत्य अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय आदि सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

विदित है कि मां अहिल्या की नगरी में करीब 100 वर्षों की प्राचीन परंपरा अनुसार महावीर जयंती पर विशाल और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है। जिसमें विभिन्न गोटों से जुलूस शामिल होते हैं। शोभायात्रा के लिए विशेष प्रकार की ड्रेस कोड तय किया जाता है। शहर के सभी 136 दिगंबर और श्वेतांबर जैन मंदिरों में अलसुबह से ही अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन विधानों का दौर शुरू हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने विश्व शांति की मंगल कामना की। इससे पूर्व श्री जी को पांडुक शिला पर विराजित कर मुनिराजों के सानिध्य में कलश और शांतिधारा की गई। संचालन मनीष अजमेरा ने किया।

भक्ति के रंग में रंगा जनसमूह
पूजन के पश्चात सभी जिनालयों से भव्य जुलूस और पालकी यात्राएं निकाली गईं। इन शोभायात्राओं में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। भगवान की पालकी के आगे श्रद्धालु नृत्य करते और जयकारे लगाते चल रहे थे। शहर के प्रमुख मार्गों पर समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा पुष्प वर्षा कर भगवान की आरती उतारी गई और पालकी यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।

देवोँ का अतिशय
शोभायात्रा के लिए मुनिराजों का विहार होना था। आसमान में धूप खिली थी। जैसे ही शोभायात्रा के लिए मुनिराज रवाना हुए। आसमान में बादल छा गए और शोभायात्रा में हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। मुनिराजों ने इसका जिक्र धर्मसभा में भी किया।

तख्तियों से दिया अहिंसा का संदेश
इस अवसर पर युवा और बच्चे हाथों में प्रेरणादायक तख्तियां लेकर चल रहे थे, जिनके माध्यम से भगवान महावीर के सिद्धांतों—अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद—का प्रचार किया गया। ‘अहिंसा परमो धर्म’ के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय में महावीर के संदेशों की प्रासंगिकता को जन-जन तक पहुँचाना रहा।

धर्मसभा को अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी, मुनि श्री संबुद्ध सागर जी, मुनि श्री आदित्यसागर जी, आचार्य श्री विमलसागर जी संबोधित किया। इस अवसर पर मुनि श्री अप्रमित सागर जी, मुनि श्री सहजसागर जी ससंघ उपस्थित रहे। इस धर्मसभा केबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक मालिनी गौड़, मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम चिंटू चौकसे मौजूद रहे। दिगंबर जैन समाज के समाज प्रमुख आनंद गोधा, विनय बाकलीवाल, अमित कासलीवाल, राजकुमार पाटोदी, नवीन गोधा, नकुल पाटोदी, अंकुल पाटोदी, कैलाश वेद, मयंक जैन सहित बड़ी संख्या में समाज जन मौजूद रहे।













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