वर्तमान आचार्य श्री समयसागर जी महाराज संघ जबलपुर में विराजमान हैं। सोमवार की आहार चर्या के दौरान मर्यादा इस तरह टूट गई कि आचार्य श्री समयसागर जी महाराज को अपनी अंजुलि त्यागकर उपवास धारण करना पड़ा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। वर्तमान आचार्य श्री समयसागर जी महाराज संसघ जबलपुर में विराजमान हैं। सोमवार की आहार चर्या के दौरान मर्यादा इस तरह टूट गई कि आचार्य श्री समयसागर जी महाराज को अपनी अंजुलि त्यागकर उपवास धारण करना पड़ा। यह स्थिति अत्यंत दुःखद और समाज एवं श्रावकों के लिए चिंतन का विषय है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि जब आचार्य श्री का जिस चौके में पड़गाहन हो रहा था, तब चौके वाले जिन श्रावकों ने पड़गाया। उनके साथ अनावश्यक रूप से 10-20 अतिरिक्त लोग भी पडगाहन में जबरन घुसकर फेरी करने लगे। आचार्य श्री ने हाथ के संकेत से उन्हें रोकने का प्रयास भी किया, किन्तु भक्ति के उत्साह में कोई ध्यान ही नहीं दे रहा था कि आचार्य श्री क्या इशारा कर रहे हैं। सब अपनी-अपनी फेरी में लगे हुए थे। मर्यादा की इस अवहेलना को देखते हुए आचार्य श्री समय सागर जी ने अंजुलि छोड़ दी और चौंके में प्रवेश किए बिना ही मंदिर वापस लौट आए और उपवास कर लिया। मंगलवार को आचार्य श्री ने अपनी मंगल देशना में समाज और श्रावकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि प्रत्येक चौका अलग-अलग मर्यादा से संचालित होना चाहिए। जिसका चौंका हो, उसी चौंके पर उसी समय मौजूद श्रावक ही फेरी लगाएं। पड़गाहन होते ही लगभग 50 लोग चौंके में जाकर बैठ जाते हैं-यह अनुचित है। यहां तक कि बाहरी व्यक्ति जिसका चौका भी नहीं है वो भी दुसरे के चौके में थाली लेकर ऐसे खड़े हो जाते हैं, जैसे चौंका उनका ही हो।
यह मर्यादा का सरासर गंभीर उल्लंघन है। जो चौके के बाहर के उन 50 लोगों से बाहर निकलने का आग्रह किया जाता है तो वे यह कहकर रुक जाते हैं कि वे यहां के ही हैं और झूठ बोलने से भी नहीं कतराते हैं लेकिन, ऐसे व्यवहार से शुद्धि में स्पष्ट दोष लगता है। राजेश दद्दू ने कहा कि श्रावक अपने मुख से शुद्धि बोलते मन-शुद्धि, वचन-शुद्धि, काय-शुद्धि की बातें तो करते हैं, परंतु व्यवहार में वचन और काय की शुद्धि का पूर्ण पालन नहीं कर पा रहे हैं। इससे साधु-संघ को अनावश्यक अंतराय होता है। आखिर साधु-संत कब तक ऐसी अव्यवस्था का सामना करते रहेंगे। आचार्य श्री ने अपने उपवास के संदर्भ में इन बातों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। दद्दू ने समाज जन से आहृवान किया कि सभी श्रावक श्रेष्ठी जन इन मर्यादाओं का पालन करें। भक्ति के साथ अनुशासन को भी समान महत्व दें और नमोस्तु शासन जयवंत हो को गौरवान्वित करें।













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