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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 37वां आचार्य पद आरोहण दिवस हर्षोल्लास से मनाया : सनावद में आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी का हुआ मंगल प्रवेश


सनावद के श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 37वां आचार्य पद आरोहण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी का मंगल प्रवेश भी हुआ। पढ़िए श्रीफल साथी सन्मति जैन काका की यह रिपोर्ट।


सनावद। नगर के श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर जी में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के 37वें आचार्य पद आरोहण दिवस के अवसर पर विशेष पंचामृत अभिषेक, पूजन एवं धार्मिक आयोजन श्रद्धापूर्वक संपन्न हुए। इस पावन अवसर पर आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी का मंगल प्रवेश भी समाजजनों के बीच उत्साह का केंद्र रहा।

आर्यिका माताजी ने बताए संत परंपरा के महत्व

समाज प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की परम शिष्या आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि “जिस नगरी में साधु-संतों का उद्भव होता है, वह नगरी स्वयं ही पावन-पवित्र हो जाती है। ऐसी ही नगरी आपकी सनावद नगरी है।”

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की परंपरा का गौरव

आर्यिका माताजी ने कहा कि वर्तमान युग में भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की महान परंपरा का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। अपने विशाल संत संघ के माध्यम से वे धर्म प्रभावना एवं आत्मकल्याण के पथ को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।

मंडलेश्वर चातुर्मास के लिए विहाररत

आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी का नगर में मंगल प्रवेश प्रातः खंडवा मार्ग से हुआ। वे मंडलेश्वर में चातुर्मास हेतु विहाररत हैं। सनावद में संत भवन में उनकी निरंतराय आचार्य चर्या सम्पन्न हुई तथा सायंकाल उनका मंगल विहार बड़वाह की ओर हुआ।

समाज की रही श्रद्धापूर्ण सहभागिता

कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आचार्य श्री के आचार्य पद आरोहण दिवस पर धर्मलाभ प्राप्त करते हुए आर्यिका माताजी के दर्शन एवं मंगल प्रवचन का लाभ लिया।

धर्म और संयम का संदेश

धार्मिक आयोजन के माध्यम से समाज में संयम, साधना, गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा तथा आत्मकल्याण की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।

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