श्रवणबेलगोला के अंबिका स्कूल में आयोजित ‘मक्कल संते’ यानी बच्चों के बाजार ने छात्रों को व्यावहारिक और व्यापारिक ज्ञान दिया। स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी ने इसे जीवन कौशल सीखने का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम में बच्चों का उत्साह देखने लायक रहा। पढ़िए विशेष रिपोर्ट रेखा जैन की
जहाँ बच्चे बने दुकानदार और स्कूल बना छोटा सा बाजार—वहीं से शुरू हुई सीखने की असली पाठशाला।
श्रवणबेलगोला से खास खबर
श्रवणबेलगोला के अंबिका स्कूल में ‘मक्कल संते’ यानी बच्चों का बाजार और खाद्य मेला बड़े उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अनोखे आयोजन ने बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर जीवन और व्यापार की व्यवहारिक समझ दी।

स्वामीजी ने बताया क्यों जरूरी है ऐसा कार्यक्रम
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी ने कहा कि मक्कल संते जैसे आयोजन बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि जीवन के जरूरी कौशल भी सिखाते हैं। इससे बच्चों में आर्थिक समझ, व्यवहार कौशल और आत्मविश्वास विकसित होता है।
बच्चे बने छोटे व्यापारी
इस मेले में बच्चों ने खुद स्टॉल लगाकर फल, सब्जियां, पानी-पूरी, जूस, सलाद और घरेलू सामान बेचे। बच्चों ने ग्राहकों से बात करना, हिसाब करना और बिक्री करना खुद सीखा। अभिभावकों और अतिथियों ने बच्चों के इस प्रयास की खूब सराहना की।
आत्मनिर्भरता की सीख
जैविक किसान राघवेंद्र बेक्का ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता बढ़ाते हैं। इससे बच्चों को पैसों की समझ और मेहनत की कीमत भी समझ में आती है।

स्वामीजी ने भी की खरीदारी
कार्यक्रम के दौरान स्वामीजी ने बच्चों से सामान खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाया। बच्चों के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ नजर आया।
विशिष्ट अतिथि रहे मौजूद
इस अवसर पर बाहुबली शिक्षण संस्थान के सचिव बबन पी. दतवाडे, मुख्य अध्यापिका सरोजा, किसान संघ अध्यक्ष मंजेगौड़ा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
जब शिक्षा में अनुभव जुड़ जाए, तो बच्चे सिर्फ पढ़ते नहीं—जीवन जीना भी सीख जाते हैं।













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