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आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ससंघ का निवाई में हुआ मंगल प्रवेश : समाजजनों ने बैंडबाजों के साथ कि भव्य अगवानी


 प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य मऺगल प्रवेश किया। निवाई से पढ़िए, यह खबर…


निवाई। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य महा मऺगल प्रवेश किया। अश्व, बग्घी, हाथी, डीजे कई बैंडबाजे, आचार्य श्री पर ड्रोन कैमरे से पुष्प वृष्टि, 57 रजत थालियों में दूध केशर, पुष्प रत्नों से चरण प्रक्षालन ,3 किमी की रांगोली, 76 से अधिक स्वागतद्वार नगर के अनेक सामाजिक, धार्मिक मंडलों सहित नगर के सभी धर्मों की सहभागिता आकर्षण का केंद्र रही। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने निवाई नगर प्रवेश पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 32 साधुओं सहित नगर गौरव आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी एवं अन्य साधुओं की जन्म नगरी निवाई में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य संघ के आगे श्रीजी शोभायात्रा में विराजित रहे निवाई की धरती का कण-कण आज इठला रहा था क्योंकि, धरती के भगवान के चरण आज उसकी धरती पर पड़ रहे थे।

आचार्य श्री शांति सागर महाराज की पंचम पट्टाधीश को अपनी भूमि पर 3 वर्ष बाद एक बार फिर पाकर निवाई वासियों का रोम-रोम पुलकित हो रहा था। रविवार प्रातः काल की बेला से ही से ही भक्तों का विभिन्न स्थानों से भक्तो आगमन प्रारम्भ हो चुका था। धर्म नगरी निवाई का बच्चा-बच्चा श्री सऺघ एव मेहमानो की अगवानी के लिए पूर्णतया तैयार था। दोपहर से ही सभी जनों के चेहरे पर उभरे खुशी के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे। निवाई वासियों के 3 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा अब पूरी होने जा रही थी। संघ का भव्य स्वागत करने हेतु निवाई प्रवेश की जगह पर भव्य तोरण द्वार बनवाया गया था। कदम-कदम पर आचार्य श्री के मंगल प्रवेश और अभिनंदन के होर्डिंग्स नजर आ रहे थे।

निवाई पूरी तरह से केशरिया रंग में रंगी थी। दोपहर 12 बजे से आस पास के गांवों से श्रद्धालुओं की अपार संख्या गुरु भक्ति के लिए प्रवेश द्वार पर पहुंचने लगीं और देखते ही देखते हजारों का अपार समूह जयकारों के उद्घोष से गूंजने लगा।  चारों और स्त्री पुरुष अगवानी करते नजर आ रहे थे। जिले की सभी समाज के सभी जन भव्य अगवानी हेतु उपस्थित थे। 2 बजे आचार्य श्री ने संघ सहित निवाई की सीमा में अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में प्रवेश कर मूल नायक भगवान के दर्शन किए।शेष संघ के 26 साधुओं ने अगवानी की प्रथमाचार्य श्री शान्ति सागर जी व आचार्य श्री वर्धमानसागर जी की जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन हुए। राजस्थान शासन के राजकीय अतिथि बनने के बाद निवाई में प्रथम बार प्रवेश हुआ। फिर प्रारम्भ हुई शोभायात्रा। आगे-आगे घोड़े, ऊंट, तरह-तरह के बैंड बाजे, साथ में विभिन्न पोशाकों में स्थानीय समाज जन। स्थानीय महिलाएं मस्तक पर कलश धारण कर चल रही थी। भक्तिभाव से युवाओं ने बैंड वादन किया।  मोसम भी अपनी मंद सुहानी धूप से आचार्य श्री की अगवानी कर रहा था ।निवाई का प्रत्येक नागरिक आज आचार्य संघ के दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने को आतुर था। श्रद्धालुओं के हुजूम के मध्य आचार्य संघ मानो किसी सिंह की भांति चल रहे थे। निवाई नगरी आज उत्साह और भावों की धरा नजर आ रही थी। दो किलोमीटर रंगोली युक्त नगर में सभी जिनालयों के भक्ति सिद्ध भक्ति सहित दर्शन किए मन्दिर जी मे दर्शन के उपरांत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री दिगंबर नसिया शांतिनाथ मंदिर के दर्शन कर आचार्य श्री सऺघ सहित मऺचासीन होने पर सर्वप्रथम श्री और आचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्रों समक्ष दीप प्रवज्जलन श्री दामोदर प्रसाद श्री हनुमानप्रसाद सिंघल परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन श्री महावीर प्रसाद,श्रीमती पिस्तौल देवी,जितेंद्र,गजेंद्र परिवार ने किया जिनवाणी श्री नेमीचंद मधुबाला संजय अंकित सिरस वाले परिवार निवाई ने भेंट की। नृत्य मंगलाचरण महिला मंडल ने किया तत्पश्चात आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज एवं पट्ट परंपरा के आचार्य वृन्द को अर्घ समर्पित किया गया। स्थानीय लोगो के सहयोग और समिति के मार्गदर्शन से गुरु प्रवेश के अवसर को एक ऐतिहासिक स्मृति बनाने में समाज के युवाओ ने श्रावकों ने अहम भूमिका निभाई। सकल दिगम्बर समाज द्वारा संघ की आहार बिहार व्यवस्था में तन,मन,धन ,से सहयोगियों का समाज ने कृतज्ञतापूर्वक सम्मान तिलक,माला,श्रीफल, स्मृति चिन्ह से किया ।इस अवसर पर आसपास के गांवों से जन समूह आचार्य संघ की अगवानी हेत निवाई आये। , जयपुर , किशनगढ़, कोटा , टोंक ,पीपल्दा लावा,डिग्गी टोडारायसिंह देवली,पिपलु,उनियारा, मालपुरा इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, और अन्य अनेक शहरों से श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।हजारो जन समूह के भावों से भरी निवाई आज सच मे धर्म नगरी लग रही थी। शाम को संपूर्ण जैन समाज को वात्सल्य भोजन प्रसाद के पुण्यार्जक फूलचंद, महावीर प्रसाद निवाई रहे। 57वर्षों का विहार आपका, दिग्विजय सा लगता है। जहां पहुंच जाते है गुरुवर, समवशरण वहीं लगता है, तेरी चर्या से गुंजित गर्जित गर्वित हो गया गगन।

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