विश्वविख्यात तीर्थस्थल श्री सम्मेदशिखरजी (मधुबन) में एक दशक से निःस्वार्थ भाव से आरोग्य सेवा प्रदान कर रही संस्था श्रीसेवायतन न्यास की ओर से संचालित श्रीसेवायतन आरोग्य केंद्र ने 11 नवंबर को मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा का शुभारंभ किया। सम्मेदशिखर जी से पढ़िए, यह खबर…
सम्मेदशिखरजी। विश्वविख्यात तीर्थस्थल श्री सम्मेदशिखरजी (मधुबन) में एक दशक से निःस्वार्थ भाव से आरोग्य सेवा प्रदान कर रही संस्था श्रीसेवायतन न्यास की ओर से संचालित श्रीसेवायतन आरोग्य केंद्र ने 11 नवंबर को एक और नया अध्याय जोड़़ते हुए मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा का शुभारंभ किया। यह मानव परोपकारी सेवा कार्य आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी की प्रेरणा से सतत् संचालित हो रहा है, जो समाज में धर्म, सेवा और मानवता के आदर्शों को साकार कर रहा है। इस सेवा का उद्देश्य शिखरजी क्षेत्र के आसपास स्थित गांवों के जरूरतमंद, ग्रामीण, वृद्धजन, महिलाएं एवं बच्चों तक निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है ताकि जो लोग मधुबन स्थित आरोग्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाते, वे भी इस सेवा से लाभान्वित हो सकें।
श्रीसेवायतन के अध्यक्ष राजकुमार जैन अजमेरा (हजारीबाग), महामंत्री विजय जैन पांडया (रांची) तथा कोषाध्यक्ष देवेंद्र जैन अजमेरा (गया) के निर्देशानुसार मोबाइल मेडिकल यूनिट की टीम ने पीरटांड प्रखंड के पालगंज ग्राम में प्रथम निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया। इस दौरान ग्रामीण मरीजों को परामर्श डॉ. सुभाष बुद्रुक और डॉ. प्रमोद पासवान ने दिया। परामर्श के बाद कई मरीजों की ब्लड जांच भी वहीं स्थल पर की गई। इन सभी जांचों की सुविधा मोबाइल मेडिकल यूनिट एंबुलेंस में ही उपलब्ध थी, जिससे मरीजों को तत्काल लाभ मिला और आवश्यक दवाइयां निःशुल्क प्रदान की गईं। शिविर में 78 मरीजों की स्वास्थ्य जांच की गई।
इन ग्रामीणों के सहयोग से हुआ कार्यक्रम
श्रीसेवायतन न्यास के प्रबंधक कैलाश जैन एवं उनकी टीम ने आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ग्रामीणों ने इस सेवा कार्य की सराहना की और संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया। मुखिया पति बिरजू साहू, महेंद्र प्रसाद, देवेश बक्सी, मनोजकुमार सिंह और किशोर सहित अनेक ग्रामीणों ने सहयोग दिया।
सेवा ही सच्चा धर्म है: अजमेरा
श्री सेवायतन के अध्यक्ष राजकुमार जैन अजमेरा ने कहा कि सेवा ही सच्चा धर्म है। श्रीसेवायतन का उद्देश्य केवल उपचार नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के माध्यम से जैन धर्म के करुणा, दया और परोपकार के सिद्धांतों को जीवन में उतारना है। संस्था की यह पहल वास्तव में धर्म, सेवा और मानवता का अद्भुत संगम है। जो जैन तीर्थ श्री सम्मेदशिखरजी की पवित्र भूमि से जनसेवा का उज्ज्वल संदेश पूरे समाज तक पहुंचा रही है।













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