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मनमोहन पार्श्वनाथ मंदिर में 5 हजार दीपकों की रोशनी: दीपों के प्रकाश और केसर चंदन की महक बिखरी 


आज जीवन भागदौड़ भरा है, चिंता-बैचेनी में शांति नगर नहीं आ रही है। स्वस्थ जीवन जीना है तो आचार-विचार और व्यवहार में संयम मार्ग अपनाना ही पड़ेगा। व्यसनों से दूरी बनाएं और रात्रि भोजन का त्याग करे। यह विचार आचार्यश्री जयानंद विजय मसा और आचार्य श्री दिव्यानंद सूरीश्वर मसा ने नवनिर्मित मनमोहन पार्श्वनाथ मंदिर में हुई धर्मसभा में व्यक्त किए। इंदौर से पढ़िए, साभार संकलित यह खबर…


इंदौर। आज जीवन भागदौड़ भरा है, चिंता-बैचेनी में शांति नगर नहीं आ रही है। स्वस्थ जीवन जीना है तो आचार-विचार और व्यवहार में संयम मार्ग अपनाना ही पड़ेगा। व्यसनों से दूरी बनां और रात्रि भोजनन का त्याग करने से बेहतर स्वास्थ्य मिलेगा। यह विचार आचार्यश्री जयानंद विजय मसा और आचार्य श्री दिव्यानंद सूरीश्वर मसा ने नवनिर्मित मनमोहन पार्श्वनाथ मंदिर में धर्मसभा में व्यक्त किए। संतों के सान्निध्य में 6 दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत बुधवार से हुई। महोत्सव समिति अध्यक्ष जयसिंह जैन, सचिव शैलेश अम्बोर ने बताया कि सुबह 6.30 बजे महिलाओं ने मंगल गीतों का गायन किया। इसके बाद नवकारसी, गुरुदेव का वरघोड़ा रेसकोर्स रोड स्थित उपाश्रय से निकला। बैंडबाजे के साथ पुरुष नाचते-झूमते नवनिर्मित मंदिर पहुंचे। 11 बजे पुराने मंदिर से जिन मंदिर नवनिर्मित में भगवान पार्श्वनाथ, भगवान आदिश्वर, दादा गुरु, राजेंद्र सूरीश्वर सहित माताजी की प्रतिमाओं का मंगल प्रवेश अध्यापन लाभार्थी परिवार गौतम मेहता ने करवाया।

वाराणसी स्वरूप में पंडाल को सजाया 

वैभव नागौर ने बताया कि मंदिर के पास तीन स्थानों पर 30 हजार वर्गफीट में पंडाल को वाराणसी स्वरूप में सजाया गया है। शाम होते ही नवनिर्मित मंदिर दीपक की जगमग रोशनी से सराबोर नजर आ रहे थ। 5 हजार से अधिक दीपक मंदिर में लगाए गए हैं। यह सज्जा रोजाना होगी। सुबह से विभिन्न रंगों और पुष्प की रंगोली भी बनाई गई। शैलेश अम्बोर ने बताया कि शाम को साढ़े सात बजे मंगल आरती और भव्य जुलूस निकाला गया। इस दौरान केसर और चंदन उड़ाया गया, जिससे पूरा क्षेत्र महक उठा। निलेश कापड़िया ने बताया कि गुरुवर को सुबह 6 बजे स्नात्र पूजन, 7 बजे कुंभ स्थापना, साढ़े सात बजे नवग्रह पाटला पूजन, साढ़े 8 बजे दस दिग्पाल पूजन सहित कई आयोजन भी हुए।

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