दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पिच्छी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है। पिच्छी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ हैं। इनके बिना अहिंसा मय महाव्रत का पालन नहीं हो सकता। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
टोंक। दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पिच्छी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है। पिच्छी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ हैं। इनके बिना अहिंसा मय महाव्रत का पालन नहीं हो सकता। आदान निक्षेपण समिति तथा प्रतिस्थापना समिति का पालन नहीं कर सकते। इस कारण समस्त दिगंबर साधु वर्ष में एक बार पिच्छी का परिवर्तन करते हैं। आचार्य श्री ने पिच्छी के गुण में बताया कि यह धूल ग्रहण नहीं करती, लघुता रहती है। पसीना ग्रहण नहीं करती। सुकुमार झुकने वाली होती है। यहां तक भी देखा गया है कि मोर पंख यदि आंखों में लग जाए तो बहुत चुभता नहीं है। इससे आंसू नहीं आते कष्ट नहीं होता। सबसे बड़ी बात यह है कि मयूर स्वयं पंख छोड़ते हैं। इस कारण कोई हिंसा भी नहीं होती। आज पिच्छी कमंडल रूपी संयम रथ निरंतर चल रहा है। इसका श्रेय प्रथमाचार्य शांति सागर जी महाराज को है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 34 साधुओं के पिच्छी परिवर्तन समारोह के अवसर पर अतिशय क्षेत्र टोंक के श्री आदिनाथ जिनालय परिसर की महती धर्म सभा में प्रगट की।
34 साधुओं की पुरानी पिच्छी पुण्यार्जकों को प्रदान की
गुरु भक्त राजेश पंचोलिया और कमल सराफ ने कहा कि आचार्य श्री ने बताया कि जिन्होंने साधुओं को संयम उपकरण पिच्छी देकर अनुमोदना की है। उन्होंने पुण्य का अर्जन किया है। मयूर पिच्छी से कोमल वस्तु संसार में नहीं है। इस महोत्सव को आपने आंखों से देखा है। साधु एक वर्ष में मयूर पिच्छी से सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवों की रक्षा करते हैं। अहिंसा महाव्रत के परिपालन का अन्य कोई उदाहरण देखने में नहीं आता है। आचार्य श्री संघ में सभी 34 साधुओं की पुरानी पिच्छी नियमों व्रत के आधार पर पुण्यशाली परिवारों को दी गई।
समाधिस्थ संयम साधना में लीन आर्यिका श्री वत्सलमति माताजी
आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व समाधिस्थ संयम साधना में संलग्न 72 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सल मति माताजी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी से लेकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद कर आचार्य श्री, सभी मुनिराज, सभी आर्यिका माताजी, समाज परिजनों से क्षमा भाव धारण कर क्षमा याचना की। आपका उपदेश सुनकर सभी के नेत्र सजल हो गए। आर्यिका श्री महायश मति जी की नई पिच्छी आचार्य को देकर आचार्य श्री ने पुरानी पिच्छी गृहस्थ अवस्था के माता-पिता संगीता राजेश पंचोलिया इंदौर, एवं आरती सनत जैन इंदौर ने प्राप्त किया। मुनि श्री मुनि श्री चिंतन सागर जी की पिच्छी गजराज लोकेश कल्ली परिवार को प्राप्त हुई। मुनि श्री हितेंद्रसागर जी की पुरानी पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य सोनू, नीतू छामुनिया टोंक परिवार तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पुरानी पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य को धर्मेंद्र कल्लू पासरोटिया टोंक को प्राप्त हुआ।
नीलम जैन ग्रुप ने 24 भगवान स्तुति का नृत्य मंगलाचरण किया
सोमवार को कार्तिक सुदी त्रयोदशी को श्री शांतिनाथ भगवान सहित 23 भगवान भूगर्भ से प्रगट हुए। इस उपलक्ष्य में श्री शांतिनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किया गया। आदर्श नगर में आहार चर्या के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर का श्री पार्श्वनाथ जिनालय आदर्श नगर से नवीन 34 पिच्छी सहित जुलूस आदिनाथ जिनालय नसिया के लिए प्रस्थान किया। आदर्श नगर समाज और चौका आहार व्यवस्था वाले नई पिच्छी मस्तक पर धारण कर चल रहे थे। सर्व प्रथम आस्था और जिया ने आचार्य श्री और पूर्वाचार्यों के चित्र समक्ष चित्र अनावरण कर दीप प्रवज्जलन किया। नीलम जैन ग्रुप ने 24 भगवान स्तुति का नृत्य मंगलाचरण किया।
राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम प्रथमाचार्य श्री शांति सागर मार्ग
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन निहालचंद बैंगलोर ने परिवार सहित और जिनवाणी राजेश, पारस, संजय, प्रवीण पंड्या परिवार किशनगढ़ ने भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान सरोज जिला प्रमुख टोंक ने जिला प्रशासन का पत्र जिसमें जखीरा से राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम प्रथमाचार्य श्री शांति सागर मार्ग करने की स्वीकृति पत्र आचार्य श्री हस्त में दिया। हजारों जन समुदाय ने घोषणा का करतल ध्वनि से स्वागत किया। मंच संचालन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं संचालन पंडित मनोज शास्त्री ने किया।













Add Comment