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रिमझिम फुहारों के बीच युगल मुनिराजों का हुआ पिच्छी परिवर्तन : मुनि श्री ने कहा- पिच्छिका में वजन नहीं संकटों को दूर करने की क्षमता है 


पिच्छी के पंख बहुत मुलायम होते हैं। आप सभी अपने जीवन को मृदुतायुक्त बनाएं। संयम व दया का यह उपकरण उन्हीं को लेने और देने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो अपने जीवन में कुछ संकल्प और नियम लेते हैं। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…


नावद। संयम का पाठ सिखाने वाला पिच्छी परिवर्तन समारोह है। दिगंबर साधु वर्षा ऋतु के समय एक स्थान पर रहकर जहां आत्म साधना करते हैं। वहीं पर श्रावकों को भी आत्म साधना करने की प्रेरणा देते हैं। वर्षा योग हमारे जीवन में नई चेतना लाती है। दिगंबर साधु की पहचान पिच्छी कमंडल से होती है। पिच्छी के पंख बहुत मुलायम होते हैं। आप सभी अपने जीवन को मृदुतायुक्त बनाएं। संयम व दया का यह उपकरण उन्हीं को लेने और देने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो अपने जीवन में कुछ संकल्प और नियम लेते हैं। देव, शास्त्र, गुरु एवं संस्कृति के प्रति समर्पित होकर अपनी श्रद्धा और आस्था मजबूत बनाए रखें। यह उदगार नगर में चतुर्मासरत मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज  ने पिच्छी परिवर्तन समारोह के की धर्म सभा में व्यक्त किए। सन्मति काका ने बताया की  पिच्छी परिवर्तन समारोह के अवसर पर आरंभ में मंगलाचरण  प्रदीप पंचोलिया, संगीता पाटोदी द्वारा किया गया। इसी क्रम में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज, विराग सागर जी महाराज, विशुद्ध सागर जी महाराज के छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन  ब्र.धर्मेन्द्र भैया, आष्टा, भोपाल, खरगोन, सिलवानी, बुरहानपुर, अब्दुलागंज, दाहोद, सीहोर,उज्जैन से पधारे अतिथियों ने किया। वही स्वागत गीत हितार्थ जैन, उत्कर्ष जैन, आराध्या जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया एवं मंगलाचरण नृत्य  गवाक्षी जैन, प्रज्ञा धनोते, अंशिता जैन ने किया।

सन्मति काका ने बताया की मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी महाराज  के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने सौभाग्य सत्येंद्रकुमार आशीषकुमार जैन सनावद परिवार को मिला। इसी क्रम में मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य अशोक कुमार परीन विभव पंचोलिया परिवार सनावद को प्राप्त हुआ।  साथ ही मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज द्वारा 4 माह की कठिन साधना से मंत्रित साधना महोदधी साध्य सिद्धि कलश पवन कुमार विनीश कुमार यश गोधा परिवार सनावद को प्रदान किया गया। अगली कड़ी में सभी आचार्यों को अर्घ्य समर्पित करने का सौभाग्य सभी समाजजनों को प्राप्त हुआ। मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज ने संक्षिप्त उद्बबोधन में कहा कि पिच्छिका में कोई वजन नहीं होता, लेकिन उसमें संकटों को दूर करने की क्षमता रहती है। यह संसार से विरक्ति पैदा करके जीवन का सार बताती है। उन्होंने सभी से इच्छाओं को त्याग कर संयम को अपनाने पर जोर दिया। अंत में मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छी पाने का सौभाग्य अनेक नियमों के पालन करने वाले पवन कुमार विनीश कुमार यश गोधा परिवार को प्राप्त हुआ। वही नई पिच्छी देने का सौभाग्य नगर में अनेक व्रतों का पालन करने वाले परिवार.को प्राप्त हुआ। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छी पाने का सौभाग्य पवन कुमार मयंक कुमार धनोते परिवार को प्राप्त हुआ। नई पिच्छी देने का सौभाग्य अनेक व्रतों का पालन करने वाले परिवार को प्राप्त हुआ। संचालन प्रशांत जैन मोनू  ने किया एवं संगीतकार कमल जैन पार्टी बड़वाह ने अपनी मधुर भजनों से सभी को मंत्र मुक्त कर दिया।आभार मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष मुकेश जैन ने माना। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।

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