सनावद में चतुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज के सान्निध्य एवं मंगल कलश निष्ठापन के साथ भगवान महावीर स्वामी का 2552वां निर्वाणोत्सव भक्ति और वैराग्य संदेश के साथ मनाया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सनावद। भगवान महावीर स्वामी के 2552वें निर्वाणोत्सव का आयोजन सनावद दिगंबर जैन समाज द्वारा अत्यंत श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि जैन धर्म धन, यश एवं वैभव लक्ष्मी के स्थान पर वैराग्य लक्ष्मी को प्राप्त करने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर चतुर्मासरत युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने मंगल कलश निष्ठापन क्रिया संपन्न कर बताया कि कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी तथा उसी रात्रि को भगवान गौतम स्वामी को कैवल्यज्ञान प्राप्त हुआ था। देवों ने गंधकुटी की रचना कर दीपों की सजावट से इस दिव्य महोत्सव को दीपोत्सव के रूप में मनाया था।
प्रातः काल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद भक्ति भाव से निर्वाण लड्डू अर्पित किए गए। निर्वाण लड्डू समर्पण का सौभाग्य नंदलाल नीरज कुमार जैनी परिवार को प्राप्त हुआ जबकि सुपार्श्वनाथ मंदिर, श्री खंडेलवाल आदिनाथ छोटा जैन मंदिर, श्रीमंदर जिनालय, महावीर जिनालय सहित पोदनपुर, णमोकार धाम, मोरतक्का एवं सिद्धवरकूट जी सहित अन्य तीर्थों में भी विधिवत अर्पण किया गया।
प्रत्येक वर्ष दीपकों की मालिका सजाई
भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने एवं अहिंसा का दीप प्रज्वलित करने हेतु प्रत्येक वर्ष दीपकों की मालिका सजाई जाती है और निर्वाण लड्डू का नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
इस पावन अवसर पर समाजजन एक-दूसरे को गले मिलकर शुभकामनाएं देते हुए आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आए। आयोजकों ने सभी आगंतुकों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।













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