परम तपस्विनी एवं जैन धर्म की आलोकमयी साध्वी आर्यिका विद्यान्तश्री गुरु मां का अवतरण दिवस आगमसम्मत एवं दिव्य भक्ति भाव से मनाए जाने का समाज से आह्वान किया गया है। उनकी दिव्य वाणी और केशलोचन की अलौकिक अनुभूति ने अनगिनत आत्माओं में वैराग्य जाग्रत किया है। पढ़िए सहारनपुर से सोनल जैन की रिपोर्ट…
परम पूज्य गुरु मां आर्यिका विद्यान्तश्री का आभामंडल अद्वितीय, अद्भुत और अपूर्व है। उनकी मधुर वाणी और दिव्य व्यक्तित्व में ऐसा अलौकिक अतिशय है कि सभी श्रावक एवं श्राविकाएँ सहज भाव से उनकी प्रेरणा को स्वीकार करती हैं। आगमानुगामी चर्या से अलंकृत ऐसी आर्यिका शिरोमणि गुरु मां का अवतरण दिवस अत्यंत भव्यता एवं आगम सम्मत ढंग से सम्पूर्ण जैन समाज द्वारा मनाया जाए — यह भावना समाज में दृढ़ता से प्रतिध्वनित हो रही है।
आर्यिका विद्यान्तश्री द्वारा दीर्घकाल तक प्राणी मात्र के कल्याण हेतु मंगल देशना दी जाती रही है। अखिल भारत जैन समुदाय उनकी दिव्य वाणी के प्रस्फुटन की प्रतीक्षा करता है। श्रद्धाभाव से जिनेंद्र प्रभु से प्रार्थना की जा रही है कि इस परम साधिका, तपस्विनी, आज्ञानुवर्ती, सुसंस्कारित एवं सुयोग्य आर्यिका गणिनी विद्यान्तश्री मां को रत्नत्रय की दिव्य प्राप्ति तथा स्व एवं पर कल्याण हेतु सुदीर्घ, सुयशपूर्ण एवं आरोग्यतापूर्ण श्रमण जीवन का मंगल आशीष प्राप्त होता रहे।
उनके दुर्लभ एवं दिव्य केशलोचन के साक्षात अलौकिक दृश्य ने श्रावक समाज में भेद विज्ञान की अनुभव यात्रा जगाई है तथा अनगिनत हृदयों में वैराग्य को गहनता से प्रज्वलित किया है। समाजजन इस वर्ष उनके अवतरण दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण एवं चरित्र साधना का उत्कृष्ट अवसर मानने की प्रेरणा से ओतप्रोत हैं।













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