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सम्यक ज्ञान है द्रव्य जैसा है उसे वैसा ही समझें : आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी के सानिध्य में दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी जारी


आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी के सानिध्य में दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी हो रही है। इसमें देशभर के विद्वत भाग लेंगे। यह संगोष्ठी 1 और 2 अक्टूबर को होगी। मंगलवार की बेला में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि ज्ञान संसार में जितने जीव है सबके पास है। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी के सानिध्य में दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी हो रही है। इसमें देशभर के विद्वत भाग लेंगे। यह संगोष्ठी 1 और 2 अक्टूबर को होगी। मंगलवार की बेला में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि ज्ञान संसार में जितने जीव है सबके पास है ज्ञान सबके काम आता है। जानना दो ही चीजे हैं या तो हम अपने आप को जाने या दूसरे को जाने। हम अपने आपको तो नहीं जानते लेकिन, हम दूसरे को जानते हैं। हम दूसरों को जानने का प्रयास करते हैं और अपने आप को नहीं जानते।

उन्होंने कहा कि यदि हमें स्वयं को जानना है तो ज्ञान को सम्यक बनाना पड़ता है। इसका मतलब है कि सत्य जिसको जैसा देखे उसको वैसा ही समझें। सम्यक ज्ञान है द्रव्य जैसा है। उसे वैसा ही समझें। वह सत्य है सम्यक ज्ञान है। यदि इसके विपरीत है तब वह मिथ्या ज्ञान है। यदि अंदर से भाव आता है कि हम अपने आप को जाने तो समझ लेना सम्यक ज्ञान है। ज्ञान सम्यकज्ञान मोक्ष मार्ग में बहुउपयोगी है।

ज्ञान ही हमें जाग्रत करता है

आचार्य श्री ने कहा कि ज्ञान को जाग्रत करो। सम्यक ज्ञान परिश्रम मांगता है। ज्ञान ही हमें जाग्रत करता है जिनवाणी का मतलब है यह सीधे हमें गोद में बिठाकर सिद्धालय में ले जाती है। जिनवाणी में विशेषता है कि यह जीव को संसार से निकलकर अध्यात्म और मोक्ष में प्रवेश कराती है। ज्ञान के बिना कुछ नहीं वह भी सम्यकज्ञान यह ज्ञान ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त करता है और कोई नहीं।

सम्यकज्ञान होगा तो सद्गति होगी

सम्यकज्ञान स्पष्ट बताता है कि क्या सत्य है क्या असत्य है क्या स्वीकार करना है क्या नहीं। अंत समय ज्ञान ही काम आएगा सोच पाओगे नहीं पाओगे, यदि सम्यकज्ञान होगा तो सद्गति होगी मिथ्या ज्ञान होगा तो दुर्गति होगी। स्वाध्याय ही हमें जागृत करता है शास्त्र ही निमित्त हैं और इन्हीं से ज्ञान को जाग्रत करो।

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