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गुरु का शिष्य प्रति अनुराग का अनुपम उदाहरण परिलक्षित: आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज की उपस्थिति में हुआ प्रत्यक्ष सागर महाराज का आहार


रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सान्निध्य में गुरु-शिष्य के बीच अनुराग और वात्सल्य का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज की आहारचर्या आचार्य के निर्देशन में सम्पन्न हुई। पढ़िए अभिषेक जैन, लुहाड़िया की रिपोर्ट…


रामगंजमंडी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सान्निध्य में नगर में अलौकिक धर्म प्रभावना हो रही है। अनेक आयोजन सम्पन्न हुए, जिनमें भक्ति और आस्था का पूर्ण परिचय दिखाई दिया।

नगर में आयोजित विभिन्न धार्मिक आयोजनों में विनय संपन्नता और वात्सल्य अंग का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। प्रतिदिन आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ के मुनिराज मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज की आहारचर्या करवाते हैं। इस प्रक्रिया में शिष्यत्व का गुण और विनय संपन्नता दोनों परिलक्षित होते हैं।

आज सोमवार की बेला में यह दृश्य विशेष रूप से देखने को मिला जब आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज स्वयं मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज का आहार करने गए। इस अवसर पर श्री महावीर दीपक शाह एवं भारत शाह प्रदीप शाह परिवार के निवास पर यह दृश्य परिलक्षित हुआ। यह गुरु-शिष्य के बीच वात्सल्य का अनुपम उदाहरण है।

जैसा कि देखा गया, जब गुरु कोई आदेश देते हैं, तो शिष्य उसे शिरोधार्य करते हुए पूर्ण करते हैं। यह दृश्य परिलक्षित करता है कि गुरु भी शिष्य के प्रति समर्पित भाव रखते हैं और वात्सल्य प्रदर्शित करते हैं।

भावपूर्ण वाणी:

• कोई शिष्य गुरु चरणों में जब शीश झुकाता है, परमात्मा खुद आकर आशीष लुटाता है।

• कोई शिष्य गुरु चरणों में पूजन का कोई थाल सजाता है, परमात्मा खुद आकर दीप जलाता है।

• कोई भाव भरे शब्दों से जब गुरु को रिझाता है, परमात्मा खुद आकर उसे गले लगाता है।

• कोई बालक बन चरणों में जब बिनती सुनाता है, परमात्मा खुद आकर गोदी में बिठाता है।

• गुरु चरणों में अश्कों के कोई मोती लुटाता है, परमात्मा खुद आकर पलकों पे बिठाता है।

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