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जीवन में ऊंचाइयों को पाना है, तो ईर्ष्या से बचें : आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने पथरिया में दी मंगल देशना 


पथरिया में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने धर्मसभा में कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत कठिन है। जीवन में ऊंचाइयों पाना है तो ईर्ष्या से अपनी रक्षा करना। पथरिया से पढ़िए, यह खबर…


 पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहे हैं। पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी भक्त वैभव बडामलहारा ने बताया की विरागोदय तीर्थ पथरिया में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने धर्मसभा में कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत कठिन है। जीवन में ऊंचाइयों पाना है तो ईर्ष्या से अपनी रक्षा करना। ईर्ष्यालु स्वयं ईर्ष्या की अग्नि में झुलसता है और दूसरों को भी संताप देता है। ईर्ष्या महा-भयंकर ज्वाला है। व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व विकास के लिए ईर्ष्या भाव से रक्षा करना चाहिए।उन्होंने कहा कि जिंदगी एक अनमोल उपकार है। हर कार्य सोच-समझकर करो।

विवेक पूर्वक भोजन करो, विवेक पूर्वक बोलो, विवेक पूर्वक उधार लो, विवेक पूर्वक उधार दो। विवेक पूर्वक यात्रा करो, विवेक पूर्वक कार्य करो। रविवार को ‘राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी’ का पंचम सत्र सम्पन्न हुआ। विशिष्ट अतिथि के लिए एकलव्य यूनिवर्सिटी के वाइस चाइंसलर पवन जी, डॉ. ऋषभ फौजदार एवं सुमतिधाम के संस्थापक, जैन महाकुंभ पट्टाचार्य महोत्सव के आयोजक मनीष सपना गोधा, इंदौर उपस्थित हुए।

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