आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से बंगाल, झारखंड और उड़ीसा के सराक क्षेत्र में पर्यूषण महापर्व के दौरान भव्य धर्म प्रभावना हुई। 20 विद्वानों ने 50 गांवों में प्रवचन, पूजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं के माध्यम से समाज को धर्म से जोड़ा। ऑनलाइन वेबिनार से देश के कई विशिष्ट व्यक्तित्व भी जुड़े। क्षमावाणी, शोभायात्रा और प्रतिभा सम्मान समारोह ने पर्व को भव्यता दी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सागर से प्रेरित होकर आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्षमति माताजी और आर्यिका श्री सुज्ञानमति माताजी के आशीर्वाद से बंगाल, झारखंड और उड़ीसा के सराक क्षेत्र में पर्यूषण पर्व का विशेष आयोजन हुआ। ब्र. मंजुला दीदी और ब्र. मनीष भैया के निर्देशन तथा भारतवर्षीय जैन सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में बुंदेलखंड से आए 20 विद्वानों ने धर्म प्रभावना की।
50 गांवों में नित्य नियम पूजन, प्रवचन, आरती, धार्मिक प्रतियोगिता, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और क्लास के माध्यम से समाज को धर्म से जोड़ा गया। कार्यक्रमों को और रोचक बनाने हेतु गूगल मीट के जरिए देशभर के प्रमुख व्यक्तित्व भी शामिल हुए। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मणीन्द्र जैन, कमलेन्द्र जैन, इंजीनियर महेश जैन, चंद्रेश जैन शास्त्री और कैलाश जैन टीला ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान क्षमावाणी और प्रतिभा सम्मान समारोह भी आयोजित हुआ। इसमें सौ से अधिक छात्र-छात्राओं, पाठशाला शिक्षकों और मंदिर कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
धर्म प्रभावना समाज की आत्मिक उन्नति का प्रतीक
समापन पर शोभायात्रा और मिष्ठान वितरण का आयोजन किया गया। विशेष रूप से, आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी ने ऑनलाइन मंगल आशीर्वचन देते हुए सभी को मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी। आर्यिका माताजियों ने कहा कि सराक क्षेत्र में ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से चल रही धर्म प्रभावना समाज की आत्मिक उन्नति का प्रतीक है। मुनि श्री नियोग सागर जी ने आशीर्वचन में समय के सदुपयोग और ज्ञानार्जन की महत्ता पर बल दिया।
स्थानीय सराक समिति के गयाराम जैन, डॉ. प्रदीप जैन, सुधांशु जैन, गौरांग जैन, रामदुलार जैन, शक्तिपथ जैन और संजय जैन सराक ने भी इस आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया।
यह आयोजन सराक समाज के लिए एक नई चेतना का प्रतीक बना, जिसने पर्यूषण पर्व को धर्म, संस्कृति और समाज सेवा का संगम बना दिया।













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