सिहोनियाँ स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में वार्षिक मेला महोत्सव और महामस्तकाभिषेक का आयोजन हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। सुबह से रात तक चले अनुष्ठानों, भक्ति संगीत, प्रवचनों और अभिषेक ने क्षेत्र को भक्ति, आस्था और शांति से भर दिया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…
अम्बाह (मुरैना) के समीप स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियाँजी में मंगलवार को वार्षिक मेला महोत्सव एवं भगवान शांतिनाथ का महामस्तकाभिषेक भव्य और अद्भुत धार्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। प्रातः 7 बजे नित्याभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया और हर ओर “जय जिनेन्द्र” के उद्घोष गूंजने लगे।
सुबह 10 बजे प्रतिष्ठाचार्य पं. राजेन्द्र जैन शास्त्री (मगरौनी) और पं. संजय शास्त्री (सिहोनियाँ) के निर्देशन में महामंडल विधान हुआ। इस अवसर पर देशभर से आए विद्वानों ने धर्मसभा को संबोधित किया और क्षमा, अहिंसा, करुणा और भाईचारे के संदेश दिए। दोपहर 4 बजे सभी की प्रतीक्षा का पावन क्षण आया। भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ की विशाल प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक शुद्ध जल व कलशों से आरंभ हुआ। जैसे ही कलशों से जलधारा बहने लगी, पूरा क्षेत्र “भगवान शांतिनाथ की जय” के उद्घोषों से गूंज उठा। इस दौरान विश्व शांति और लोककल्याण की कामनाएं की गईं।
मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूम उठे
सांध्यकाल में जैन स्वर संगम सौरभ एंड पार्टी (मुरैना) द्वारा भक्ति गीत और भजनों की प्रस्तुति हुई। मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूम उठे और वातावरण में गहन भक्ति रस व्याप्त हो गया।इस आयोजन को सफल बनाने में श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी सिहोनियाँजी की पूरी कार्यकारिणी ने विशेष योगदान दिया। आशीष जैन ‘सोनू’ (संरक्षक), जिनेश जैन (परम संरक्षक), रविन्द्र जैन ‘टिल्लू’ (अध्यक्ष), नीलेश जैन (उपाध्यक्ष), विवेक जैन ‘बंटी’ (मंत्री) और अन्य पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं की व्यवस्था और सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जैन तीर्थ देश की संस्कृति के माथे का तिलक
धर्मसभा में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि — “जैन तीर्थ देश की संस्कृति के माथे का तिलक हैं। इनकी महिमा आस्था और भक्ति से ही जीवित रहती है।” रात्रि में भगवान की 108 दीपकों से महाआरती ने पूरे आयोजन को दिव्यता और शांति के संदेश के साथ सम्पन्न किया। यह मेला महोत्सव आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक वैभव का अनुपम संगम सिद्ध हुआ। दिल्ली, अजमेर, इटावा, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, डबरा और गोरमी सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर में भाग लिया। आयोजन के अंत में निःशुल्क वात्सल्य भोजन की व्यवस्था की गई, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।













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