विश्व के 195 देशों में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसमें जैन, हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सभी धर्म के लोग एक साथ निवास करते हैं। भारत की भूमि पवित्र है क्योंकि, इस मिट्टी में भगवान महावीर, राम, नारायण, श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों का देश है। यह बात मुनि श्री सिद्धसागरजी ने शुक्रवार को प्रवचन के दौरान कही। नान्द्रे से पढ़िए, यह खबर…
नांद्रे। अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने बताया कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागरजी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने नांद्रे में प्रवचन में कहा कि विश्व के 195 देशों में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसमें जैन, हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सभी धर्म के लोग एक साथ निवास करते।
भारत की भूमि पवित्र भूमि है क्योंकि, इस मिट्टी में महावीर, राम, नारायण, श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों का जन्म हुआ है लेकिन, बीच में कुछ ऐसे गोरे लोग आए, जिनका तन गोरा था परंतु मन बहुत काला था। जिनकी वजह से हमारा अखंड भारत कई खंडों में बंट गया। उपकार है इन वीरों का भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, मंगल पांडे, विक्रम वेदा, तात्या टोपे और बॉर्डर पर खड़े वो सैनिक जिन्होंने प्राणों की चिंता नहीं की, परिवार की चिंता नहीं की, देश की रक्षा के लिए प्राणों को न्योछावर कर दिया। जितना उपकार इस देश में साधुओं का है,उतना ही उपकार हमारे उन सैनिकों का है, जो बॉर्डर पर खड़े होकर देश की रक्षा कर रहे हैं। साधु धर्म की रक्षा करते हैं और सैनिक देश की रक्षा करते हैं और हमारे देश का किसान साधु और सैनिक दोनों के ही प्राणों की रक्षा करता है। परस्परोपग्रहो जीवानाम। सबका एक दूसरे पर उपकार है।













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