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जैन विरासत सहेजना वर्तमान की आवश्यकता : दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को प्रशस्ति प्रमाण पत्र बांटे


श्रमण संस्कृति विद्या वर्धन ट्रस्ट के गोम्मट्ट गिरी तीर्थ क्षेत्र में आयोजित दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। महू की आभा जैन प्रावीण्य सूची में अव्वल रही। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। जैन दर्शन वह दर्शन है, जिसके पास संस्कृति और संस्कार का संचित कोष है। विश्व के समस्त धर्म में सर्वाेपरि जैन धर्म शांति प्रदाता एवं आत्मा से परमात्मा की व्याख्या कर स्वयं से साक्षात्कार करने वाला दर्शन है यह विचार डॉ. बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के निदेशक दीपक कुमार वर्मा ने श्रमण संस्कृति विद्यावर्धन ट्रस्ट के गोम्मट्ट गिरी तीर्थ क्षेत्र में आयोजित दीक्षांत समारोह में व्यक्त किए।

संस्था संयोजक डॉ. अनुपम जैन ने कहा कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से प्रमाणिक जानकारी के साथ पूजा, पाठ और विधान आदि संपन्न किए जाकर विश्व मंगलकारी भावना का संचार होगा। दीक्षांत समारोह में 37 विद्यार्थियों को प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

महू की आभा जैन ने प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रारंभ में मंगलाचरण उषा पाटनी ने किया। स्वागत भाषण संस्था अध्यक्ष भानुकुमार जैन व संस्था के कार्य उपलब्धियों की जानकारी मंत्री कैलाश वेद ने किया। संचालन डॉ. संगीता विनायका ने किया।

 आभार रवि गंगवाल ने माना। इस अवसर पर डॉ. शोभा जैन, राजेंद्र गंगवाल, कैलाश मामा, पदम बाकलीवाल, पवन जैन, अभिषेक जैन आदि गणमान्य उपस्थित रहे।

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