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मन की एकाग्रता अभ्यास से बढ़ती है : युवादल को पारमार्थिक कार्य के लिए 21हजार की राशि भेंट 


आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के रविवार को प्रवचन हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर और आसपास के नगरों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं प्रवचनों का लाभ लेने के लिए आए। आचार्यश्री ने इस अवसर पर धर्मसभा में कहा कि मन की एकाग्रता अभ्यास से बढ़ती है। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के रविवार को प्रवचन हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर और आसपास के नगरों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं प्रवचनों का लाभ लेने के लिए आए। आचार्यश्री ने इस अवसर पर धर्मसभा में कहा कि मन की एकाग्रता अभ्यास से बढ़ती है। सबसे बड़ा मित्र मोक्ष है सब अपने-अपने कर्मों का फल भोग रहे हैं। सबके कर्म समान नहीं होते कर्म प्रक्रिया भिन्न होती है। फल की प्रक्रिया भी भिन्न होती है, जो कर्म हमने किए हैं उसे भोगना ही पड़ेगा। यदि हम उसकी निर्जरा नहीं कर पाए तो कर्म का फल कर्म का कर्ता व्यक्ति स्वयं होता है। आपने जिसकी की मदद की। वह आपके साथ नहीं जाएगा, आपका स्वयं का कर्म आपके साथ जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रयास किया जाना चाहिए कि मन वचन काय अशुभ प्रवृति न करे। बुरा ना सोचे बुरा ना बोले बुरा ना कहीं हम चाहे तो यह विचार कर सकते हैं कि किसी का बुरा ना हो।

अकेला आया था, अकेला ही जाऊंगा यह चिंतन हो 

परिवार के लिए कर रहे हैं बच्चों के लिए कर रहा हूं। दीन दुखियों के लिए कर रहा हूं कि उनका अच्छा हो। कर्म अच्छे हैं तो कर्ता तुम ही हो बुरे किए हैं तो भी कर्ता तुम हो कर्म के फल तुम्हें ही भोगना होगा। यदि तुमने किसी को गाली दी है तो उसका फल भी तुम्हें ही भोगना होगा। कितने को लेकर आए थे कितने तुम्हारे साथ जाएंगे लेकिन, अगर यह विचार आ जाता है कि अकेला आया था, अकेला ही जाऊंगा यह चिंतन होना चाहिए। प्रयास करें कि सब मिला है लेकिन इन सब में भी हम संसार को कम कर सकते हैं। तो तुम अगले भव को भी सुधार सकते हैं। विज्ञान की बात पर 100 प्रतिशत विश्वास नहीं करना, जब तक वह आगम से मेल नहीं खाता। यदि वह आगम से मेल नहीं खाता तो वह सत्य नहीं हो सकता। विज्ञान ने हमें दिया लेकिन, हमसे बहुत कुछ छीन लिया। श्वास की कीमत शरीर से है। वैसे ही आत्मा की सुरक्षा के लिए धर्म जरूरी है

भक्तों ने की चातुर्मास कलश की स्थापना 

आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के वर्षा योग हेतु भक्तों ने विधि विधान के साथ चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना की। जो विधि विधान के साथ हुआ। मंगल प्रवचन से पूर्व मंगलाचरण वरिष्ठ पत्रकार आदिनाथ चैनल ब्यूरो चीफ पारस जैन पारसमणि ने किया। समाज की ओर से उनका स्वागत-अभिनंदन किया गया।

बाढ़ग्रस्त बस्तियों में लोगों की मदद की युवादल ने 

विगत तीन दिनों पूर्व रामगंज मंडी नगर में भारी बारिश रही है जिससे काफी बस्तियों में पानी भर गया एवं लोगों को मदद के लिए रामगंज मंडी युवा दल आगे आया और भोजन के पैकेट वितरित किए। जिसमें रामगंजमंडी युवा दल के सचिव एवं श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्री संघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने सक्रिय भूमिका निभाई। रविवार को प्रवचन में पहुंचकर उन्होंने आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उनका समाज की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। पारख ने कहा कि दिगंबर जैन समाज ने हमारे इस कार्य में सहयोग के लिए 21 हजार की राशि प्रदान की है। उनका धन्यवाद ज्ञापित करने में यहां पर आया हूं। इसी के साथ उन्होंने कहा कि मेरा यह प्रयास रहता है कि नगर में जहां कहीं भी जैन संत मुनि विराजमान हों। उनके उद्बोधन को अखबारों के माध्यम से हमारी जिनवाणी महावीर का संदेश है शास्त्रों में लिखी बाते हैं जन-जन तक पहुंचाकर जैन धर्म और जिनवाणी का प्रचार कर सकूं। जीवन में हर आदमी को ऊपर उठाने का काम करो नीचे गिराने का काम मत करो।

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