पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी का चातुर्मास इन दिनों नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर चल रहा है। मुनिराजों की मौजूदगी से भक्तजन भी गद्गद् हैं। यहां मुनिराजों के रोजाना प्रवचन हो रहे हैं। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे (महाराष्ट्र)। पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी का चातुर्मास इन दिनों नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर चल रहा है। मुनिराजों की मौजूदगी से भक्तजन भी गद्गद् हैं। यहां मुनिराजों के रोजाना प्रवचन हो रहे हैं। शिष्य मुनि श्री जयंत सागरजी ने यहां अपने प्रवचन में कहा कि अहो मित्र, जैसे बिना नेटवर्क के मोबाइल की कोई कीमत नहीं होती, वैसे ही बिना गुरु के इंसान की कीमत नही होती। इसलिए जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरु नहीं। ऐसा प्रसंग मेरे जीवन में था। बिना गुरु के दर-दर भटक रहा था, लेकिन जब से 2019 से आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी के दर्शन किए और उस दिन का दिन है और आज का दिन है, जीवन में सम्यक राह क्या होती है, सत क्या है, असत क्या है, इसका सत्यार्थ बोध गुरुवर ने करा दिया।
मुझे गर्व है अपने गुरु पर उन्होने कभी ये नहीं कहा कि बेटा सिर्फ विशुद्ध सागर ही तुम्हारे गुरु हैं, उन्होंने तो यह कहा कि इस जगत में जितने दिगंबर मुनिराज हैं वे सब तुम्हारे गुरु हैं। इसलिए अब बहुत जिया जीवन व्यर्थ का, बस अब खोज करो सच्चे गुरु की और सोच बदल दो जीवन की जिससे जीवन आपका सार्थक हो सके।













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