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जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं: गुरुवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनेगा 


गुरुवार के दिन गुरु पूर्णिमा होने से विशेष महत्व की है क्योंकि, गुरुवार गुरु का गुरु ग्रह से संबंध है। गुरु ग्रह ज्ञान शिक्षा, दीक्षा, अध्यात्म से जुड़ा हुआ ग्रह है। जैन ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु बनाना चाहिए। मुरैना से पढ़िए, यह खबर…


मुरैना। भारतीय संस्कृति में गुरु का विशेष स्थान है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा महोत्सव 10 जुलाई को मनाया जा रहा है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा के दिन हर वर्ष गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई गुरुवार को है। गुरुवार के दिन गुरु पूर्णिमा होने से विशेष महत्व की है क्योंकि, गुरुवार गुरु का गुरु ग्रह से संबंध है। गुरु ग्रह ज्ञान शिक्षा, दीक्षा, अध्यात्म से जुड़ा हुआ ग्रह है। जैन ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु बनाना चाहिए। जब तक गुरु जीवन में नहीं तब तक जीवन सही मायने में शुरू नहीं। वैसे तो मनुष्य के जन्म से ही गुरु रहते हैं। प्रथम गुरु बच्चों की मां होती है। जिसने जन्म दिया, फिर शिक्षक जिन्होंने शिक्षा प्रदान की।

उसके बाद आध्यात्म को बताने वाले आत्म ज्ञान देने वाले गुरु कहलाते हैं। जैन ने कहा कि हमें किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए गुरु बनाना ही पड़ता है। बिना गुरु के संस्कार और फिर ज्ञान प्राप्त नहीं होता। गुरु पूर्णिमा के दिन सभी को अपने गुरुओं का पूजन कर उनका गुणगान करना चाहिए।

इस दिन प्रात स्नान करके भक्ति भाव के साथ स्वच्छ वस्त्र धारण कर अपने गुरु के पास फल फूल वस्त्र माला द्रव्य आदि लेकर प्रसन्न मन से जाना चाहिए। गुरु के पाद प्रक्षालन कर तिलक लगाकर पुष्प माला पहनाकर पूजन कर आशीर्वाद लेना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य के सभी रोग शोक, भय समाप्त होकर मन में अच्छे विचार एवं संस्कार मिलते हैं और उसे शांति आनंद की अनुभूति के साथ ज्ञान की प्राप्ति होती है।

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