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तीर्थंकर नेमिनाथ का किया महामस्तकाभिषेक: निर्वाण लाड़ू के साथ निकली घटयात्रा


मुनिराजश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन वेला में भगवान नेमिनाथ का स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य पंकज जैन मेडिकल, अजय राजीव जैन टीटू को एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य अजयकुमार राजीव जैन गोसपुर, शैलेशकुमार अभिषेक जैन सोना क्रॉकरी, महावीरप्रसाद विमलकुमार बघपुरा, महेशचंद बनवारीलाल जैन को प्राप्त हुआ। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मुनिराजों के सान्निध्य में उल्लास पूर्वक मनाते हुए निर्वाण लाड़ू समर्पित किया गया। मुनिराजश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन वेला में भगवान नेमिनाथ का स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य पंकज जैन मेडिकल, अजय राजीव जैन टीटू को एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य अजयकुमार राजीव जैन गोसपुर, शैलेशकुमार अभिषेक जैन सोना क्रॉकरी, महावीरप्रसाद विमलकुमार बघपुरा, महेशचंद बनवारीलाल जैन को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर प्रथम निर्वाण लाड़ू समर्पित करने का सौभाग्य राजकुमार गौरव जैन सीए को प्राप्त हुआ। ब्रह्मचारी संजय भैयाजी बम्होरी एवं अजय भैयाजी (झापन वाले) के निर्देशन में भगवान नेमीनाथ स्वामी का अष्टद्रव्य से पूजन किया गया। भगवान नेमिनाथ निर्वाण कल्याणक पर जैन मंदिर में प्रातःकाल से ही जैन बंधुओं में भारी उत्साह देखा गया। सभी भक्तगण जैन भजनों पर भक्ति नृत्य कर तीर्थंकर नेमिनाथ की जय जयकार कर रहे थे।

सिद्धचक्र विधान के पात्रों का हुआ चयन

आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के प्रारंभ से पूर्व दिलीप जैन मधुवन दिल्ली द्वारा ध्वजारोहण किया गया। विधान के लिए सौधर्म इंद्र पवन कुमार सिद्धार्थ जैन, श्रीपाल मैना सुंदरी विमल शशि जैन बघपुरा, कुबेर इंद्र पंकज संगीता जैन मेडिकल, महा यज्ञनायक डालचंद निखिलकुमार बरहाना, यज्ञ नायक नेमीचंद ममता जैन ट्रांसपोर्ट, भरत चक्रवर्ती भागचंद मुकुल जैन, ईशान इंद्र मीना सुरेशचंद केशव कॉलोनी, सानत इंद्र बनवारीलाल महेशचंद जैन का चयन किया गया। सभी पात्रों को पूज्य गुरुदेव ने सभी पात्रों को शुभाशीष प्रदान किया। कार्यक्रम के मध्य पूज्य गुरुदेव मुनिश्री विलोकसागर महाराज के प्रवचन हुए। मुनिश्री ने अपने मंगल उद्वोधन में श्री सिद्धचक्र विधान के महत्व के संबंध में सभी बंधुओं को जानकारी दी। सभी साधर्मी बंधुओं को विधान में सम्मिलित होने बाबत प्रोत्साहित किया।

आज से होगा विधान का शुभारंभ

आज प्रातःकालीन वेला में मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के पावन सान्निध्य में एवं बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी के आचार्यत्व में श्री सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ होगा। सर्वप्रथम पात्र शुद्धि, मंडप शुद्धि, पांडाल शुद्धि, भूमि शुद्धि के पश्चात श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य नियम पूजन किया जाएगा। सभी आवश्यक क्रियाओं के बाद विधान का पूजन आरंभ होगा। प्रथम दिन भक्तिभाव से सिद्धों की आराधना करते हुए 32 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।

घटयात्रा में महिलाओं ने की सहभागिता

विधान के प्रारंभ से पूर्व मांगलिक क्रियाओं के तहत घटयात्रा निकाली गई। सौभाग्यशाली महिलाएं एवं कन्याएं अपने सिर पर मंगल कलश रखकर चल रहीं थी। मंगल कलश में मांगलिक बस्तुओं के साथ जल लाया गया। उसी जल से विधान स्थल की शुद्धि की जाएगी। विधान में सम्मिलित होने वाले सभी साधर्मी बंधुओं, माता बहनों को आयोजन समिति की ओर से साड़ियां, धोती, दुपट्टा, हार, मुकुट आदि सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। 3 जुलाई से शुरू होने जा रहे आठ दिवसीय अनुष्ठान में निरंतर आठ दिन सिद्ध परमेष्ठि की आराधना की जाएगी।

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