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चार दिवसीय "संस्कार धर्म यात्रा" का इंदौर में भव्य समापन : सच्चे संस्कार व्यावहारिक अनुभव से ही आते हैं-मुनि पूज्य सागर


अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज की चार दिवसीय संस्कार धर्म यात्रा का समापन दिगंबर जैन पोरवाड़ समाज मांगलिक भवन में पूर्ण भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। यह यात्रा 19 जून को सनावद से प्रारंभ होकर 22 जून को इंदौर में समाप्त हुई। इस आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को संस्कारों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट….


इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज की चार दिवसीय संस्कार धर्म यात्रा का समापन दिगंबर जैन पोरवाड़ समाज मांगलिक भवन में पूर्ण भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। यह यात्रा 19 जून को सनावद से प्रारंभ होकर 22 जून को इंदौर में समाप्त हुई।

इस आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को संस्कारों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था। प्रतिदिन औसतन 70 श्रद्धालुओं ने इस यात्रा में भाग लिया, जिसमें 5 वर्ष से लेकर 75 वर्ष तक के साधक सम्मिलित थे। विशेष रूप से करीबन 25 श्रद्धालु संपूर्ण यात्रा में निरंतर मुनि श्री के साथ पदयात्रा में शामिल रहे।

समापन समारोह की झलकियां

समापन दिवस की शुरुआत मंगलाचरण से हुई, जिसे अनिता जैन, सुनीता दबाड़े, शानल जैन और सुलेखा जटाले ने प्रस्तुत किया। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य नरेंद्र वेद, कैलाश वेद, सुनील जैन (डीपीएस), सुदर्शन जटाले और श्रेष्ठी जैन को प्राप्त हुआ। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन नमीष जैन, श्रेष्ठी जैन, श्रीमंदर जटाले, विजय जैन, नवनीत जैन और हर्ष जैन द्वारा किए गए।

शास्त्र भेंट में सक्रिय भूमिका निभाने वालों में नरेंद्र वेद, रेखा जैन, संजय जैन, पवन पाटोदी, कमलेश जैन, हितेश जैन, सुनील जैन (DPS), प्रशांत जैन, सोनू जैन, चंद्रशेखर जैन (बालसमुद), सचिन जैन, दीपक जैन (पिपलगोन), और पवन धनोते (कसरावद) शामिल रहे।

साधु-संन्यासियों के प्रति रखें श्रद्धा भाव

इस अवसर पर मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि किताबी ज्ञान केवल बौद्धिक विकास करता है, लेकिन सच्चे संस्कार व्यावहारिक अनुभव से ही आते हैं। इस यात्रा के माध्यम से बच्चों ने सीखा कि साधु जीवन में आहार, विहार और निहार कैसे होता है। जब बच्चे यह देखते हैं कि एक मुनि बिना आहार के 45 किलोमीटर चल सकता है, तब उनका दृष्टिकोण ही बदल जाता है। यह अनुभव जीवनभर साथ रहेगा। मुनि श्री ने विशेष रूप से बच्चों को मुनि निंदा से दूर रहने और साधु-संन्यासियों के प्रति श्रद्धा भाव रखने की प्रेरणा दी।

किया गया सम्मान

इस अवसर पर यात्रा में सहभागिता करने वाले 65 यात्रियों को प्रमाण पत्र और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। इनमें 14 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक के प्रतिभागी शामिल थे। इसके अतिरिक्त करीब 40 व्यक्तियों को विशिष्ट सेवाओं के लिए भी सम्मानित किया गया।

आयोजन की व्यवस्थाएं

आहार व्यवस्था पवन धनोते, बच्चों के भोजन की व्यवस्था सुनील जैन, यात्रा मार्ग की व्यवस्था दीपक जैन, राहुल जैन, भूपेंद्र जैन ने की। संयोजन रेखा जैन और

संचालन नमीष जैन (अध्यक्ष, पोरवाड़ समाज, इंदौर) ने किया। आभार प्रदर्शन श्रेष्ठी जैन (सचिव) ने किया। समारोह में कैलाश वेद, डॉ. धीरेन्द्र जैन, नकुल पाटोदी, साधना मदावद, मंजू राजेश अजमेरा, राजेश नीता जैन, सन्मति जैन काका, लोकेंद्र जैन सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन श्रमण चर्या परिवार और श्रीफल जैन न्यूज के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। इस संस्कार यात्रा में सनावद, बड़वाह, बालसमुद, पिपलगोन, कसरावद तथा पोरवाड़ समाज इंदौर का विशेष सहयोग रहा, जिनका भी समारोह में सम्मान किया गया।

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