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गुणों की पहचान बिना मिट्टी का घड़ा भी नहीं मिलता : मप्र में पढ़ाई जा रही आचार्यश्री की रचनाएं 


आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने देशभक्ति से ओतप्रोत देश और धर्म के लिए जिओ रचना लिखी, जिसे मध्यप्रदेश शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। आचार्य श्री की अद्भुत संचना, जो ‘एक सुखद सुखद अनुभूतियों का अहसास- मां’ शीर्षक से कक्षा-8 की मप्र शिक्षा बोर्ड में शामिल है। खतौली से पढ़िए, सोनम जैन की यह खबर…


खतौली। जिनकी लेखनी से सृजित अनेकानेक पद्यात्मक मौलिक रचनाएं समाज एवं राष्ट्र के लिए मार्गदर्शन बनी हैं। ऐसे आदर्श महाकवि आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने देशभक्ति से ओतप्रोत देश और धर्म के लिए जिओ रचना लिखी, जिसे मध्यप्रदेश शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है। आचार्य श्री की अद्भुत संरचना, जो ‘एक सुखद सुखद अनुभूतियों का अहसास- मां’ शीर्षक से कक्षा-8 की मध्यप्रदेश शिक्षा बोर्ड में शामिल की गई है। जो आज युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बन रही है। 16 जून की प्रातः बेला में आचार्य श्री ने धर्मनगरी खतौली के सभी दिगंबर जैन मंदिरों की अपने चतुर्विध संघ के साथ पद विहार करते हुए वंदना की। पुनः जिन मंदिर में आकर आचार्य प्रवर ने उपस्थित धर्मसभी को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान के गुण गाएंगे, भगवन् सम बन जाएंगे। राग-द्वेष राहत अहा, शुद्ध आत्मा पाएंगे। गुण का पूजक ही, हो-हो, गुणवान कहाए रे (जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे} गुणों की पहचान होते ही हमें उन गुणों से समन्वित द्रव्य-पदार्थ प्राप्ति हो जाती है और गुणों की प्राप्ति होते ही उन गुणों से परिपूर्ण की पहचान हो पूर्ण द्रव्य की भी प्राप्ति हो जाती है।

आप तरबूज खरीदने बाजार जाते हो तो सर्वप्रथम उसमें चाक लगाकर देखते हो कि यह तरबूज कहीं अंदर से खराब तो नहीं है। आप एक मिट्टी का घड़ा लेने जाते हैं तो ठोंक-बजाकर उसकी जांच करते हैं कि यह कहीं से फूटा तो नहीं है। जरा विचार कीजिए कि कुछ नाचीज तरबूज अथवा घड़े को आप बिना गुणवत्ता के ग्रहण नहीं करते किन्तु हमारी सबसे बड़ी खोज ‘जो भगवान की खोज है’ उसमें बिना विचार के ही मात्र भगवान संज्ञा अर्थात् किसी ने कह दिया कि यह भगवान है, आप उसे ही अपना भगवान मान बैठते हैं। कोई जांच, कोई परीक्षा नहीं, यह कैसी आपकी श्रद्धा है कि आज ये भगवान, कल कोई और प्रभावशाली दिखा कल से वहीं भगवान। बंधुओ। यथार्थ में यह श्रद्धा-भक्ति नहीं यह तो घोर अज्ञानता है। हमेशा ध्यान रखो, भगवान शब्द अपने आप ही कह रहा है।

भग अर्थात ज्ञान और वान माने वाला अर्थात जो पूर्ण ज्ञान वाला है वही भगवान है। पूर्ण ज्ञानवान एक मात्र ‘सर्वज्ञ और वीतरागी’ ही हैं। स्वर्ग के देवता अवधिज्ञानी हो सकते हैं, पूर्ण ज्ञानी नहीं। गुणों की खोज करो आपको भगवान स्वयमेव मिल जाएंगे।

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