मुनिराजों का यहां की नगरी में विराजमान होना ही पुण्य की बात है। यहां के धर्मप्रेमी समाज को आचार्य और मुनिराजों के धर्म देशना में आशीर्वचन सुनने को मिल रहे हैं। यहां धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी ने कहा कि नज़रों में वो ही दिखते हैं, जो दिल में बसते हैं, वरना सामने होकर भी लोग गुमनाम रहते हैं। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…
विदिशा। मुनिराजों का यहां की नगरी में विराजमान होना ही पुण्य की बात है। यहां के धर्मप्रेमी समाज को आचार्य और मुनिराजों के धर्म देशना में आशीर्वचन सुनने को मिल रहे हैं। यहां धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी ने कहा कि नज़रों में वो ही दिखते हैं, जो दिल में बसते हैं, वरना सामने होकर भी लोग गुमनाम रहते हैं। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि सच्चे रिश्ते केवल आंखों से नहीं, दिल से देखे जाते हैं। जब कोई हमारे हृदय में स्थान बना लेता है, तब उसकी उपस्थिति हर क्षण महसूस होती है, भले ही वो दूर हो लेकिन, जिनके लिए दिल में जगह नहीं होती।
वे पास होकर भी अजनबी से लगते हैं। मुनिश्री ने कहा कि यह जीवन भी कुछ ऐसा ही है। अगर हम किसी कार्य, लक्ष्य या रिश्ते को दिल से अपनाएंगे, तो वो हमारे लिए महत्वपूर्ण बन जाएगा। वरना लाख कोशिशें करने पर भी वो हमारी नज़रों से ओझल ही रहेगा। इसलिए अपने दिल को पवित्र रखें, उसमें अच्छाई, सच्चाई और प्रेम को स्थान दें क्योंकि, जहां दिल लगेगा, वहीं जीवन की असली पहचान मिलेगी।













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