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आचार्य श्री सुंदर सागर जी को श्रीफल किया भेंट: नैनवा आने का विनम्र आग्रह समाजजनों ने किया 


कोटा में रिद्धि-सिद्धि दिगंबर जैन जिनालय में विराजमान आचार्य श्री सुंदरसागर जी महाराज संघ को दिगंबर जैन समाज नैनवां की ओर से श्रीफल भेंट कर प्रवास के लिए निवेदन किया। यहां पर आचार्यश्री ने प्रवचन में एकजुटता की बातें समझाईं। नैनवा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


नैनवा। कोटा में रिद्धि-सिद्धि दिगंबर जैन जिनालय में विराजमान आचार्य श्री सुंदरसागर जी महाराज संघ को दिगंबर जैन समाज नैनवां की ओर से श्रीफल भेंट कर प्रवास के लिए निवेदन किया। इस अवसर पर नैनवा की ओर से बीस पंथ समाज अध्यक्ष कमलकुमार मारवाड़ा, वर्षायोग समिति मंत्री नेतीलाल जैन, मीडिया प्रभारी महावीर सरावगी, कोषाध्यक्ष कमलजैन चैप्टर, मोहनलाल जैन मारवाड़ा, विनोदकुमार जैन मारवाड़ा, निर्मल जैन पाटनी, टोनी जैन, महेंद्र सेठी, अतुल जैन मारवाड़ा, संजय जैन मारवाड़ लवी जैन मारवाड़, आशीष मोडीका, जयंत सोगानी, शैलेंद्र जैन मारवाड़ा, सुनील मारवाड़ा, राकेश जैन मारवाड़ा आदि समिति के सदस्य ने श्रीफल भेंट किया। दिगंबर जैन समाज नैनवा ने श्रीफल भेंटकर निवेदन किया कि कुछ समय का प्रवास जयपुर जाते वक्त हमें दें। आचार्य श्री ने सभी भक्तों को मधुर मुस्कान के साथ आशीष प्रदान किया। मंगल प्रवचन में आचार्य श्री सुंदर सागर जी ने कहा कि मोक्ष रूपी चार दरवाजे हैं। उनको खोलने के लिए अपने मन की चाबी का लगाना बहुत जरूरी है। अपने हाथ में पांच उंगली होती है तभी हाथ की शोभा है।

एक उंगली कट जाने पर मुनि नहीं बन सकता, पांचों उंगली का होना बहुत उपयोगी है। मुनि ने बताया कि विश्राम के लिए की चारपाई के चार पागे होते हैं। चार पागो में एक पागा का विघटन होने पर चारपाई की कीमत समाप्त हो जाती है। उसका अस्तित्व नहीं होता। जिनवाणी सुनने से आत्मा को शांति प्राप्त होती है। शस्त्र जीव का विनाश करता है और शास्त्र जीवन का कल्याण करता है। उन्होंने कहा जिनवाणी सुनने से नर से नारायण बन जाता है।

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