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मंदिर विध्वंस मामले में सांसद का सीएम फडणवीस को पत्र: सांसद नवीन जैन और मुख्यमंत्री की फोन पर हुई चर्चा


जैन मंदिर को विध्वंस करने के मामले में राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से फोन पर चर्चा की एवं उन्हें पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया। विगत दिनों विले पार्ले (पूर्व) मुंबई में 30 वर्ष से भी अधिक पुराने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को मुंबई महा महानगरपालिका ने ध्वस्त कर दिया था। पढ़िए मुरैना/आगरा से मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना/आगरा। जैन मंदिर को विध्वंस करने के मामले में राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से फोन पर चर्चा की एवं उन्हें पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया। विगत दिनों विले पार्ले (पूर्व) मुंबई में 30 वर्ष से भी अधिक पुराने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को मुंबई महा महानगरपालिका ने ध्वस्त कर दिया था। सांसद जैन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र लिखकर एवं फोन पर चर्चाकर संपूर्ण जानकारी से अवगत कराते हुए दोषी अधिकारियों के निलंबन एवं मंदिर के पुनःनिर्माण के बार्रे में त्वरित कार्रवाई का निवेदन किया। आगरा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से फोन पर चर्चा की और पत्र के माध्यम से बताया कि मंदिर विध्वंस की जानकारी से मेरे हृदय को गहरी ठेस पहुंची है। जब मुझे सूचना मिली कि विले पार्ले (पूर्व) मुंबई में स्थित पार्शवनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जो 30 वर्षों से अधिक समय से जैन श्रद्धालुओं का पवित्र तीर्थ रहा है, को मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने 16 अप्रैल को ध्वस्त कर दिया है। यह घटना केवल एक मंदिर का विध्वंस नहीं, बल्कि लाखों जैन श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास पर गहरा आघात है। मेरे संज्ञान में आया है कि यह विध्वंस एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। जिसका उद्देश्य एक होटल समूह को अनुचित लाभ पहुंचाना था। जब जैन समाज ने इस अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध किया तो पुलिस ने उनकी आवाज को दबाया और हमारी श्राविकाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया। हमारे पवित्र धार्मिक ग्रंथों को सड़कों पर फेंक दिया गया और तीर्थंकरों की मूर्तियों का अपमान किया गया, जो अहिंसा, त्याग और करुणा के प्रतीक हैं। इस घटना के वीडियो और चित्र देशभर में वायरल हो रहे हैं। जिससे प्रत्येक जैन हृदय में दुख, क्रोध और निराशा व्याप्त है।

कार्रवाई का अनुरोध 

सांसद जैन ने लिए लिखा कि मुख्यमंत्री महोदय, आप हमारी आशा और विश्वास के केंद्र हैं। मेरी आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि इस अमानवीय कृत्य को गंभीरता से संज्ञान में लें और दोषी अधिकारियों का तत्काल निलंबन और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाएं। आपके एक निर्णय से न केवल जैन समाज का विश्वास पुनस्थापित होगा, बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि महाराष्ट्र में हर आस्था का सम्मान और उसकी रक्षा सर्वाेपरि है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप इस पीड़ा को समझेंगे और तत्काल कार्रवाई करेंगे।

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