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फाल्गुन की अष्टा्ह्निका में सिद्धचक्र मंडल विधान: 14 मार्च को होगा विधान समापन, पूजन, अभिषेकादि हुए


सीवीवी डायमंड सिटी के मध्य स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पार्ले पॉइंट में विराजित श्री चंद्रप्रभु भगवान की अनुकंपा एवं आचार्यश्री देवनंदी जी के शिष्य मुनिश्री शुभमकीर्तिजी महाराज के आशीर्वाद एवं सानिध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान जारी है। इसका समापन 14 मार्च को होगा। इंद्र प्रतिष्ठा ध्वजा रोहण, अभिषेक और शांतिधारा विधान पूजा करके किया गया। सूरत से पढ़िए दीपक प्रधान की खबर… 


सूरत। सीवीवी डायमंड सिटी के मध्य स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पार्ले पॉइंट में विराजित श्री चंद्रप्रभु भगवान की असीम अनुकंपा से एवं आचार्यश्री देवनंदी जी शिष्य मुनिश्री शुभमकीर्तिजी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं पावन सानिध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 6 से 14 मार्च तक चल रहा है। विधान का शुभारंभ देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा ध्वजा रोहण, अभिषेक और शांतिधारा विधान पूजा करके किया गया।

विधान में मुख्य सौधर्म इंद्र पुण्यार्जक निशा देवी अरुण, प्रतीक, श्रुति, वर्णिका, अनुज, शुभांशी, रियांशी, माईशा, रियांश, अयांश जैन दिल्ली वाले परिवार एवं शशि पवन, अनुभा विनय,रीना विकास, अंकिता विपुल, मिलन, तान्या, सौम्या, सम्यक, नमन, आशिका, मनन जैन (मेरठ वाले) वाले परिवार रहे और सकल दिगंबर जैन समाज के धर्मिष्ठ श्रावकों ने पूजा में बैठकर सिद्धचक्र पूजा-आराधना का सौभाग्य प्राप्त किया। विधान की विधि प्रतिष्ठाचार्य पं. सनतकुमार, पं.विनोदकुमार रजवास (मध्यप्रदेश), पं.रुपेश भाई(खंडवावाले), सूरत, पं.अनुज भाई के निर्देशन में हो रही है। विधान का समापन 14 मार्च को विश्व शांतियज्ञ अनुष्ठान एवं श्रीजी की रथयात्रा कर विधान पूर्ण संपन्न होगा। समाज में बहुत ही हर्ष व्याप्त है।

सिद्ध भगवानों के समूह की आराधना है सिद्धचक्र

विधान के तहत श्री शुभमकीर्ति जी ने प्रवचन के माध्यम से बताया कि सिद्ध भगवानों के समूह की आराधना करना सिद्धचक कहलाता है। दृष्टांत हैं कि एक राजा को इस बात का घमंड हो गया था कि सभी उसका दिया हुआ खाते हैं। एक दिन उसने अपनी दोनों पुत्रियों को बुलाया। जिसमें से एक पुत्री ने अपने भाग्य से खाने की बात कही। इस पर राजा नाराज हो गया और उसने पुत्री मैनासुंदरी का विवाह कोढ़ी से करा दिया। मुनिराज ने जिनालय में जाकर उसे सिद्धचक्र विधान करने के बारे में बताया। मैना सुंदरी ने सिद्धचक्र विधान करने पर उसके पति का कुष्ट दूर हो गया। कार्यक्रम में ट्रस्टी आशी शालू नोवा ग्रुप, अशोक विनायका, राजाभाई शाह, नरेश भाई दिल्ली, कमलेश गांधी ने समाज के सभी विज्ञजनों का आभार माना। साथ ही 10 अप्रैल को मनाए जाने वाले महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव की रूपरेखा बताई।

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