मंथन पत्रिका

दोहों का रहस्य - 11 मोह-माया से मुक्ति में है जीवन की शांति का सूत्र : संतोष और सादगी से मिलता है धर्म का वास्तविक मार्ग


दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की ग्यारहवीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…


रुखा सूखा खाइकै, ठंडा पानी पीव।

देख विरानी चूपड़ी, मन ललचावै जीव।


“रुखा सुखा खा के” का अर्थ है कि व्यक्ति को अपने जीवन में उपलब्ध साधनों में संतुष्ट रहना चाहिए। “देख विरानी चूपड़ी” का अर्थ है दूसरों की संपत्ति और सुखों के प्रति आकर्षण धार्मिक मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। मोह-माया से ग्रस्त व्यक्ति का मन अशांत और अस्थिर रहता है। यह दोहा हमें यह सिखाता है कि सादगी, संतोष और मोह-माया का त्याग धर्म के मूलभूत सिद्धांत हैं। ईश्वर के प्रति प्रेम को समझने और उसे स्वीकार करने के लिए मन की स्थिरता और संतोष आवश्यक हैं। यदि व्यक्ति इस संदेश को आत्मसात करता है, तो वह न केवल धार्मिकता को प्राप्त कर सकता है, बल्कि जीवन में वास्तविक शांति और ईश्वर की समीपता का अनुभव भी कर सकता है। अर्थात, जो हमारे पास है वही पर्याप्त है।

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