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मंदिरों की भी साफ-सफाई : आर्यिका सरस्वती माताजी ने किए केशलोचन


 नगर में चातुर्मासरत गणिनी आर्यिका सरस्वती माता जी ने केशलोचन किया। चूंकि दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं। अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नर्ही रख सकते व ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते है और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इस लिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। पढ़िए यह रिपोर्ट…


सनावद। नगर में चातुर्मासरत गणिनी आर्यिका सरस्वती माता जी ने केशलोचन किया। सन्मति काका ने बताया कि चूंकि दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं। अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नर्ही रख सकते व ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते है और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इस लिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। इस लिए वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केश लोंच कहते है। वैसे केशलोंच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है।

दिगम्बर मुनि महाव्रती होते है और 22 परिषह को सहज ही सहन करते है तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं। जिसमें हाथों से केशलोंच करना एक आवश्यक क्रिया है। और चूंकि केशलोंच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती है जिसके प्राश्यचित स्वरूप मुनि उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगम्बर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते है जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नही रहता है। मुनि स्वयम भी अभय होते है और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते है। इस अवसर पर अचिंत्य जैन, लवीश पाटनी,सुनील पांवणा, प्रशांत जैन, हेमा मुंशी, प्रेरणा जटाले, पुष्पा जैन, उपस्थित रहे।

आज मनाया जायेगा आचार्य शांति सागर जी महाराज का समाधि दिवस

सनावद में चतुर्मासरत आर्यिका सरस्वती माता जी के सानिध्य में 20 वीं शताब्दी के प्रथम आचार्य शांति सागर जी महाराज का समाधि दिवस पार्श्वनाथ बड़ा मंदिरजी में प्रातः पंचामृत अभिषेक सामूहिक पूजन पश्चात आचार्य शांति सागर विधान माताजी के सानिध्य में किया जाएगा

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