नगर के अनिल कुमार जैन ने पीड़ा व्यक्त की है कि समाज की सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि हम कई टुकड़ों में बांट दिए गए हैं या बंटे हुए है।अखिल भारतीय या अखिल राज्य स्तरीय कोई संगठन नहीं है, जो सभी जैन समाज का प्रतिनिधित्व करता हो। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
अनिल कुमार जैन ने पीड़ा व्यक्त की है कि समाज की सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि हम कई टुकड़ों में बांट दिए गए हैं या बंटे हुए है।अखिल भारतीय या अखिल राज्य स्तरीय कोई संगठन नहीं है, जो सभी जैन समाज का प्रतिनिधित्व करता हो। समाज को जोड़ने के लिए, जैन धर्म मजबूत हो, समाज कल्याण मे अग्रणी भूमिका निभाए, के लिए मैं प्रयासरत हूं। मैंने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से पत्राचार किया है। हम जैनी अखिल भारतीय जैन यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीलेंस खोलना चाहते हैं। सरकार भी चाहती है शिक्षा के क्षेत्र में निवेश हो। वो अनुदान देने को भी तैयार है। लेकिन असली समस्या है कि जैन समाज में पत्राचार किससे करे? किस एड्रेस पर करे? उनके सवाल, पत्र का जवाब कौन देगा
एकता की जरूरत
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है अब समय आ गया है। जिला स्तरीय, राज्य स्तरीय, अखिल भारतीय स्तरीय जैनों का प्रतिनिधि मण्डल होना चाहिए। वैसे मैं अच्छी तरह जानता हूं कि अभी के जैन को मरना मंजूर है पर झुकना मंजूर नहीं है। जैन समाज को एक करने का मतलब है जिंदा मेंढक को तराजू पर तौलना। लेकिन समय की जरूरत, मांग को समझते हुए आपसी सहमति, एकता की बहुत जरुरत है। आज ईसाई मिशनरियों से सीखने की जरुरत है। कैसे समाज कल्याण कर वो पूरे विश्व में फैल गए हैं। चर्च छोटा, स्कूल- कॉलेज बड़ा बनाते हैं।समस्या वहां भी होगी पर एक बात वो समझते हैं कि लड़ाई आपस में हो। लेकिन जब बाहर से हो तो हम सब एक हैं। क्या हम जैनी हर मंदिर के पंच कल्याणक के साथ एक जैन विद्यालय का शिलान्यास समारोह संपन्न नहीं कर सकते हैं? आज मुस्लिम समाज मस्जिद के साथ मदरसा बनाते हैं। बहुत ही अच्छा काम है। क्या हम जैनी सचमुच नासमझ हैं। इतने उदाहरण पड़े हैं। देखकर, पढ़कर हम लोग क्यों नहीं बदल रहे हैं?
शुरुआत कैसे करना चाहिए? पहले अपने में करो सुधार, फिर दूसरे को बताओ अपने विचार
पारसनाथ में एक उच्च स्तरीय जैन यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना करनी है।
1. इसके लिए एक गवर्निंग बॉडी बनानी होगी। जिसमें झारखण्ड जैन समाज के प्रबुद्ध लोग होंगे।
2. वर्किंग कमेटी बनानी होगी। जो उस यूनिवर्सिटी का संचालन करे। उसकी रूप रेखा तैयार करे।
3. एक ऑफिस एड्रेसहोना चाहिए। जहां लोग मिल सकें। पत्राचार कर सकें।
सरकार तैयार है पर क्या हम सचमुच एकजुट होने को तैयार हैं? जुड़ेगा जैन समाज तो आगे बढ़ेगा जैन समाज। नहीं तो अपना अस्तित्व समाप्त कर लेगा जैन समाज।













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